CJP प्रोटेस्ट में प्रेग्नेंट महिला अधिकारी के बच्चे की पेट में ही मौत? सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल; क्या है इस दावे की सच्चाई?
सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हो रहे हैं जिनमें दावा किया गया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के पथराव के कारण दिल्ली पुलिस की एक गर्भवती महिला अधिकारी का गर्भस्थ शिशु (unborn child) खत्म हो गया।
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सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हो रहे हैं जिनमें दावा किया गया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के पथराव के कारण दिल्ली पुलिस की एक गर्भवती महिला अधिकारी का गर्भस्थ शिशु (unborn child) खत्म हो गया। हालांकि, पुलिस सूत्रों ने इस दावे को गलत बताया है।
वायरल पोस्ट
सोशल मीडिया पर दिल्ली पुलिस की एक महिला अधिकारी की तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें वह जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन स्थल पर कथित तौर पर बेहोश हालत में दिख रही हैं।
तस्वीर में कई पुलिस अधिकारी बेहोश होने के बाद उस महिला अधिकारी को संभाले हुए दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया के कई यूजर्स ने दावा किया कि चार महीने की गर्भवती अधिकारी को प्रदर्शनकारियों द्वारा फेंके गए पत्थर लगे थे।
उन्होंने आगे दावा किया कि हिंसा के बाद उनके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुई गर्भवती महिला पुलिस अधिकारी अपने गर्भस्थ शिशु को नहीं बचा सकीं।
ऐसी ही एक पोस्ट में लिखा था, "खबर है कि एक महिला पुलिस अधिकारी को पत्थर लगा... वह चार महीने की गर्भवती थीं और डॉक्टरों ने कहा कि उनके गर्भस्थ शिशु को बचाना बहुत मुश्किल होगा। महिला पुलिस अधिकारी के पति ने आरोप लगाया है कि अभिजीत दिपके और उनके साथियों के भड़काऊ संदेशों ने स्थिति को और खराब कर दिया, जिसकी कीमत एक गर्भस्थ शिशु को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। उनका कहना है कि वह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले सभी आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।"
पुलिस सूत्रों ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने इस दावे का खंडन किया है कि जंतर-मंतर पर हिंसा के कारण एक गर्भवती महिला पुलिस अधिकारी ने अपना बच्चा खो दिया। सूत्रों ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें विरोध प्रदर्शन के दौरान ली गई थीं, जब महिला पुलिसकर्मी घटनास्थल पर भगदड़ जैसी स्थिति के कारण घायल हो गई थीं।
जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन
युवाओं के नेतृत्व वाली 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) 6 जून से जंतर-मंतर पर डेरा डाले हुए है और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है।
इस आंदोलन ने तब और अधिक ध्यान आकर्षित किया जब इसे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का समर्थन मिला, जो विरोध स्थल पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। 20 से अधिक दिनों तक उपवास करने के बाद, पुलिस उन्हें जबरन अस्पताल ले गई। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को एक पत्र लिखकर हड़ताल खत्म करने की पेशकश की है, बशर्ते सरकार यह भरोसा दिलाए कि इस आंदोलन में शामिल होने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई दंडात्मक या जवाबी कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 23 July 2026 at 17:12 IST