अपडेटेड 18 January 2026 at 20:01 IST
मोबाइल टॉर्च जला चिल्लाता रहा बचाओ-बचाओ...नोएडा में 'लापरवाही के गड्ढे' में गिर इंजीनियर की मौत; दिल चीर देगा पापा से कहे उसके आखिरी शब्द
पापा मैं डूब रहा हूं, मुझे आकर बचा लो...पिता जब पहुंचे, तो बेटा कार समेत गहरे गड्ढे में गिरा हुआ था और बचाओ-बचाओ चिल्ला रहा था। लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पिता के सामने ही बेटे की तड़प-तड़पकर मौत हो गई।
पापा मैं डूब रहा हूं, मुझे आकर बचा लो...पिता जब पहुंचे, तो बेटा कार समेत गहरे गड्ढे में गिरा हुआ था और बचाओ-बचाओ चिल्ला रहा था। लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पिता के सामने ही बेटे की तड़प-तड़पकर मौत हो गई। कोहरे के कहर ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान ले ली। घटना यूपी के नोएडा की है, जहां शुक्रवार रात हादसे में 27 साल के युवराज मेहता की दर्दनाक मौत हो गई। आप जानकर सन्न रह जाएंगे कि सूचना देने के बाद मौके पर पुलिस और दकमकल कर्मियों को पहुंचने में 50 मिनट का वक्त लग गया।
दूर खड़े पिता राजकुमार मेहता के बार-बार मिन्नत करने के बावजूद मौके पर पुलिसकर्मी और दमकलकर्मी युवराज को बचाने के लिए पानी में नहीं उतरे। बचाव कार्य शुरू करने से इन्कार कर रहे कर्मियों ने कोहरे के बीच प्लॉट मे भरे ठंडे पानी और उसमे बने निर्माणाधीन कॉलम से टकराने के डर का हवाला दिया। वहीं, नॉलेज पार्क फायर स्टेशन से दमकल कर्मी भी छोटी और बड़ी क्रेन के साथ मौके पर पहुंचे।
उन्होंने क्रेन लगाकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर को निकालने का प्रयास किया लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी। इस बीच रात 1:45 बजे युवराज कार सहित पानी के अंदर जा समाया। कुछ देर बाद एसडीआरएफ की टीम आई। लेकिन स्टीमर नहीं होने की वजह से बचाव कार्य के लिए इंतजार करना पड़ा। गाजियाबाद से आई एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। पानी में स्टीमर उतारने के बाद और टार्च की रोशनी में युवराज को पानी से बाहर निकाला। लेकिन तबतक युवराज की मौत हो गई थी।
विस्तार से जानिए पूरा घटनाक्रम
जानकारी के मुताबिक, युवराज मेहता गुरुग्राम स्थित एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। वह देर रात ऑफिस से अपने घर लौट रहे थे। कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम थी और सड़क किनारे बने नाले या खाली प्लॉट की कोई पहचान नहीं थी। इसी दौरान उनकी कार सड़क से फिसलते हुए नाले की बाउंड्री तोड़कर पानी से भरे गहरे प्लॉट में जा गिरी।
ठंडे पानी में फंसे युवराज ने अपने पिता राजकुमार मेहता को फोन कर कहा, ‘पापा, मैं पानी में फंसा हूं, बहुत ठंड लग रही है, जल्दी आ जाइए…’ इसके बाद वह लगातार मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन दुर्भाग्यवश कोई समय पर उनकी सहायता के लिए आगे नहीं आया। आसपास मौजूद कुछ राहगीरों ने हादसे की आवाज सुनी, लेकिन हिम्मत न जुटा पाने के कारण केवल फोन करते रहे। जब तक पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक युवराज की मौत हो चुकी थी।
पिता ने अधिकारियों पर लगाया आरोप
नौजवान बेटे की मौत की खबर सुनते ही पूरा परिवार दहल गया। बेटे की मौत से पिता सदमे में हैं और उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है कि उन्होंने अपना काम ठीक से नहीं किया। मेहता परिवार ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने न तो सर्विस रोड पर रिफ्लेक्टर लगाए थे और न ही नालियों को ढका था। पिता ने कहा कि घने कोहरे में रिफ्लेक्टर ना होने के कारण उनके बेटे की जान चली गई। वहीं मामले को लेकर नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन के प्रभारी सर्वेश कुमार ने भरोसा दिया कि लापरवाही पाए जाने पर जांच की जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मदद मिलती तो बच जाती जान
युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने बताया कि बेटे ने उसी वक्त मुझे फोन किया था। उसने कहा कि वह यहां फंस गया है और उसे तैरना नही आता। उसने कहा कि मैं निकल नहीं पाऊंगा। तब उन्होंने लखनऊ में अपने किसी परिचित पुलिस वाले को फोन किया। इसके बाद यहां की पुलिस को फोन किया गया। लगभग आधे घंटे बाद जब मदद को टीम पहुंची तब तक काफी देर हो चुकी थी।
सोसायटियों में भरा है पानी
सेक्टरवासी कई बार प्राधिकरण से नाले के आसपास बाउड्रीवॉल और रिफ्लेक्टर लगवाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने पुलिस से संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। आशंका है कि कोहरे की वजह से एटीएस ली-ग्रैडिओस सोसायटी के मोड़ पर नाले का सही अंदाजा नहीं लगा। इसलिए कार गड्डे में जा गिरी। यह 30 से 40 फुट गहरा है। इसमें आसपास की सोसायटियों का पानी भर जाता है। बिल्डर इसी जगह मॉल बनवा रहा था।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 18 January 2026 at 20:01 IST