40 दिनों में 70 बार चोरी, जेब-मोजे में छिपाते थे नोट... राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की पहली रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

राम मंदिर ट्रस्ट में दान की रकम चोरी को लेकर SIT की पहली जांच रिपोर्ट ने पूरे मामले की परतें खोल दी हैं और तस्वीर जितनी सामने आई है, उतनी ही चिंताजनक है।

 
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Ram Mandir Theft Row | Image: Republic

राम मंदिर ट्रस्ट में दान की रकम चोरी को लेकर SIT की पहली जांच रिपोर्ट ने पूरे मामले की परतें खोल दी हैं और तस्वीर जितनी सामने आई है, उतनी ही चिंताजनक है।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित की थी, जिसके अध्यक्ष आयुक्त विजय विश्वास पंत हैं। 23 जून को सौंपी गई इस गोपनीय रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वो हैरान करने वाले हैं।

70 बार हुई चोरी, सीसीटीवी में कैद हुए सबूत

जांच टीम ने 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो पता चला कि इस छोटी सी अवधि में ही 70 बार चोरी की वारदातें हुईं। फुटेज में गिनती करने वाले कर्मचारी नोटों की गड्डियां और खुले नोट अपनी जेबों, कपड़ों और यहां तक कि जूतों में छिपाते हुए साफ नजर आए।

इन कर्मचारियों की सैलरी महज 15 से 20 हजार रुपये महीना है, लेकिन जब इनके और इनके परिजनों के बैंक खातों की पड़ताल हुई तो वहां भारी नकदी और एफडी मिलीं, जो कमाई से कहीं ज्यादा थीं। हैरानी की बात ये है कि एसआईटी के गठन से पहले ही ट्रस्ट इनसे करीब 78.94 लाख रुपये बरामद कर चुका था।

वहीं, सोशल मीडिया पर जो अफवाहें उड़ रही थीं कि सिंधी समाज द्वारा दान की गई 200 किलो चांदी और अन्य चांदी की ईंटें गायब हो गईं, वो पूरी तरह गलत निकलीं। ये सारा सामान या तो ट्रस्ट की निगरानी में सुरक्षित मिला, या भारत सरकार की टकसाल में गलाकर रखवा दिया गया।

July 6, 2026

इन 6 कर्मचारियों पर गिरी गाज

सीसीटीवी फुटेज और वित्तीय सबूतों के आधार पर सीधे तौर पर चोरी में लिप्त पाए गए संविदा कर्मचारियों में शामिल हैं - अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रामाशंकर मिश्रा। एसआईटी ने इन सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है।

चोरी कैसे होती रही, किसी को भनक तक नहीं लगी?

रिपोर्ट बताती है कि ये सब मुमकिन ही इसलिए हो पाया क्योंकि तय नियम-कायदों को ताक पर रख दिया गया था:

- गिनती कक्ष में आने-जाने वाले कर्मचारियों की तलाशी नहीं होती थी।
- बिना जेब वाली वर्दी पहनने का जो नियम था, उसका पालन नहीं कराया गया।
- कर्मचारी अपने साथ मोबाइल फोन और निजी सामान अंदर ले जाते रहे।
- अलग-अलग हुंडियों से आने वाली रकम को बिना अलग हिसाब रखे आपस में मिला दिया जाता था।
- ऑडिट में सुझाव दिया गया था कि कम से कम 180 दिन का सीसीटीवी बैकअप रखा जाए, लेकिन ट्रस्ट के पास सिर्फ 45 दिन का ही बैकअप निकला, यही वजह है कि पुरानी चोरियों का सही अंदाजा भी नहीं लगाया जा सका।

निगरानी करने वालों की भूमिका भी सवालों के घेरे में

अकेले निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि ऊपर बैठे जिम्मेदार लोग भी लापरवाही के दायरे में आए हैं। ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा, जो वित्तीय मामलों की देखरेख करते थे, उन्हें तलाशी न होने की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने इसे सख्ती से लागू कराने के बजाय पहले से तय नियमों को ही ढीला कर दिया।

गिनती कक्ष के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, जिनकी नियुक्ति डॉ. मिश्रा की सिफारिश पर हुई थी, उन पर भी घोर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप है, क्योंकि तलाशी व्यवस्था लागू कराना उन्हीं की जिम्मेदारी थी।

और फिर नाम आता है रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का, जिनके पास बिना किसी औपचारिक अधिकार के हुंडियों की चाबियां रहती थीं। इन्हीं की सिफारिश पर इनके रिश्तेदार मनीष कुमार यादव को गिनती के काम में लगाया गया था, जो बाद में चोरी के मुख्य आरोपियों में शामिल निकले।

कार्रवाई और इस्तीफे

एसआईटी ने छह मुख्य आरोपियों के अलावा सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के खिलाफ भी कर्तव्य में घोर लापरवाही, साजिश और अपराध को बढ़ावा देने की धाराओं में केस दर्ज कर जांच करने को कहा है।

रिपोर्ट सामने आने के बाद ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया, जिसे ट्रस्ट ने मंजूर कर लिया। फिलहाल श्री कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री बनाया गया है, वहीं नए सीईओ की तलाश के लिए रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है।

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Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 6 July 2026 at 23:27 IST