'जिसे शक है वो मंदिर आकर चढ़ावा देखें, गोली चलाने वाले पाठ न पढ़ाएं', किस पर भड़के राम मंदिर कोषाध्यक्ष? कृष्ण गोपाल बने अंतरिम महासचिव
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक खत्म होने के बाद कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने कहा कि कृष्ण मोहन को राम मंदिर ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव बनाया गया है।
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राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक खत्म होने के बाद कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कृष्ण मोहन को राम मंदिर ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव बनाया गया है।
उन्हें ट्रस्ट का कामकाम सौंपा गया है। इसके साथ ही चंपत राय का इस्तीफा भी मंजूर कर लिया गया है।
अंतरिम महासचिव का बयान
कृष्णा मोहन अंतरिम महामंत्री ने कहा कि तब तक मुझे महामंत्री के दायित्व का निर्वहन करना है, जब तक नए महामंत्री की नियुक्ति नहीं होती है। कहीं न कहीं प्रबंधन और संचालन में कमियां रह गई थी, जिसका लोगों ने फायदा उठाया। मेरा काम होगा लूप होल्स को बंद करना। इसको बंद करने का मेरा पूरा प्रयास रहेगा। समाज के मन में अविश्वास का भाव और जो छवि हमारी धूमिल की गई है, उसको दूर करने के लिए जो भी आवश्यक होगा, वो करेंगे और साख को पुनः स्थापित करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा गया?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने कहा, यह तय किया गया था कि ट्रस्ट की तय बैठक, जो मूल रूप से 11 जुलाई को होनी थी, उसे जल्द से जल्द आयोजित किया जाए। इसलिए, सभी को जानकारी देने के बाद, हमने इसे आज, 6 जुलाई को आयोजित किया। बैठक में सम्मानित अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज, सम्मानित शंकराचार्य जी महाराज, युग पुरुष परमानंद जी महाराज, पेजावर के विश्व प्रसन्न तीर्थ जी महाराज, हमारे नए ट्रस्टी कृष्ण मोहन जी और अयोध्या के जिला कलेक्टर शशांक त्रिपाठी जी शामिल हुए। इस तरह, पूरी कोरम के साथ हुई यह बेहद अहम बैठक एक लंबा और सफल सत्र रहा, जिसने सभी को एक साथ लाया।
चंपत राय ने क्यों इस्तीफा दिया?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने कहा, हम सभी इससे आहत और दुखी हैं। चोरी कितनी बड़ी या छोटी थी, यह गौण बात है; मुख्य चिंता की बात यह है कि यहां ऐसा माहौल कैसे बनने दिया गया। लेकिन सच्चाई हमारे सामने है और इस पर विचार करना हमारा कर्तव्य है। इसलिए, तय तारीख से पहले ही, हम आज गहरे चिंतन और दुख के साथ इकट्ठा हुए।
उन्होंने कहा मौजूदा हालात में एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई: हमारे महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल जी मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया। महासचिव के तौर पर काम कर रहे चंपत राय बहुत दुखी थे। उन्हें लगा कि जब तक न्याय पूरी तरह नहीं हो जाता, यानी दोषियों को पकड़ा नहीं जाता और उन्हें उचित सजा नहीं मिलती, तब तक अपने पद पर बने रहना ठीक नहीं है। इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने इस्तीफा दिया। यह ऐसा मामला नहीं था जिसे हम बस स्वीकार या अस्वीकार कर सकें। के. परासरन ने एक अहम बात कही: ट्रस्ट के संविधान के अनुसार, इस्तीफा सौंपते ही उसे स्वीकार मान लिया जाता है।
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Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 6 July 2026 at 18:55 IST