अपडेटेड 25 March 2026 at 22:24 IST

UP: 30 दिनों में हैवानियत का हिसाब चुकता, मासूम संग कुकर्म और हत्या करने वाले को पॉक्सो कोर्ट ने दी फांसी की सजा

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद में इंसानियत को शर्मसार करने वाले जघन्य कांड पर अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया जिसने हैवानियत करने वालों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं।

Follow :  
×

Share


UP: 30 दिनों में हैवानियत का हिसाब चुकता, मासूम संग कुकर्म और हत्या करने वाले को पॉक्सो कोर्ट ने दी फांसी की सजा | Image: Republic

Kushinagar News: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद में इंसानियत को शर्मसार करने वाले जघन्य कांड पर अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया जिसने हैवानियत करने वालों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। मासूम बच्चे के साथ दरिंदगी और बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी पिंटू उर्फ कोयल को विशेष पॉक्सो कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। महज 30 कार्यदिवसों में पूरी हुई यह न्यायिक प्रक्रिया अपराधियों के लिए चेतावनी है कि अब कानून का शिकंजा पहले से ज्यादा तेज और खतरनाक हो चुका है। अदालत ने आरोपी पर 3.25 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोका है।

मासूम की चीखें, जिसने झकझोर दिया इलाका

22 फरवरी 2026 की रात जटहां बाजार थाना क्षेत्र में खुशियों का माहौल मातम में बदल गया। तिलक समारोह में शामिल होने गया मासूम ‘अंकुश’ अचानक गायब हो गया। परिजनों की बेचैनी और डर पूरी रात बढ़ती रही, लेकिन अगली सुबह जो सामने आया उसने हर किसी की रूह कंपा दी। 23 फरवरी को खैरा माई स्थान के पास मासूम का शव मिला। निर्दयता की सारी हदें पार कर दी गई थीं। इस खौफनाक वारदात ने पूरे इलाके में गुस्से की आग भड़का दी।

पुलिस का शिकंजा: तकनीक से पकड़ा गया दरिंदा

घटना के बाद कुशीनगर पुलिस ने ऐसी तेजी दिखाई कि अपराधी के बच निकलने के सारे रास्ते बंद हो गए। विवेचक आलोक यादव की अगुवाई में टीम ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए एक-एक सबूत इकट्ठा किया। e-Sakshya ऐप के जरिए डिजिटल साक्ष्य जुटाए गए और फोरेंसिक जांच में डीएनए रिपोर्ट ने आरोपी के गुनाह पर मुहर लगा दी। सिर्फ 9 कार्यदिवसों में जांच पूरी कर 7 मार्च 2026 को चार्जशीट दाखिल कर दी गई। यह कार्रवाई अपने आप में मिसाल बन गई।

13 दिनों में मौत की सजा

पडरौना कुशीनगर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने इस दरिंदगी को हल्के में लेने से इनकार कर दिया। रोजाना सुनवाई हुई, गवाहों को तुरंत पेश किया गया और अभियोजन पक्ष ने एक-एक तथ्य मजबूती से रखा। एडीजीसी जीपी यादव, एसपीपी सुनील मिश्रा और संजय कुमार तिवारी की सख्त पैरवी के बाद अदालत ने महज 13 कार्यदिवसों में फैसला सुनाते हुए आरोपी को मौत की सजा सुना दी। यह फैसला सिर्फ एक सजा नहीं, बल्कि हैवानियत के खिलाफ कानून का खौफनाक संदेश है कि मासूमों पर जुल्म करने वालों का अंजाम सिर्फ और सिर्फ मौत है।

इसे भी पढ़ें- 'भारत दलाल देश नहीं बन सकता', सर्वदलीय बैठक में जयशंकर का दो टूक जवाब

(कुशीनगर से पीके विश्वकर्मा की रिपोर्ट)

Published By : Ankur Shrivastava

पब्लिश्ड 25 March 2026 at 22:24 IST