दीवार के अंदर तिजोरी, घर के कोन-कोने में कैश; 13KG सोना और 9 किलो चांदी... पूर्व ARTO ने 68 लाख को कैसे बना दिए 35 करोड़? काली कुंडली ने खोला राज
उत्तर प्रदेश के विजिलेंस विभाग ने रिटायर असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (ARTO) ललित कुमार के लखनऊ में स्थित मकान से बुधवार को करीब 35 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की।
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उत्तर प्रदेश के विजिलेंस विभाग ने रिटायर असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (ARTO) ललित कुमार के लखनऊ में स्थित मकान से बुधवार को करीब 35 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की। ललित कुमार के खिलाफ जांच सन 2020 में शुरू हुई थी। उस समय वे ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में इंस्पेक्टर थे और उन पर 68.66 लाख रुपये की आय से अधिक संपत्ति जमा करने का आरोप था। सवाल उठ रहा है कि कोई ट्रांसपोर्ट अफसर इतनी बेशुमार दौलत कैसे कमा सकता है।
विजिलेंस टीम जब पूर्व एआरटीओ ललित कुमार के अलीगंज स्थित चंद्रलोक कॉलोनी वाले घर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। जांचकर्ताओं ने घर के अंदर अलग-अलग ठिकानों पर पैकेटों में छिपाकर रखी गई करीब 1.62 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद की है। अधिकारियों ने सभी संदिग्ध ठिकानों को खंगालकर इस गुप्त कैश को जब्त कर लिया, जिसे अब आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए केस डायरी और चल रही जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।
घर के हर कोने में कैश, विजलेंस ने जहां मारा हाथ वहीं से निकला सोना
छापे में ललित के घर पर कई लॉकर व ज्वैलर्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दो तिजोरियां मिली हैं जिसमें नकदी, सोने-चांदी के बिस्किट और जेवरात बरामद हुए। इसके अलावा टोयोटा इनोवा, हुंडई आई-20 कार, रिवॉल्वर, विभिन्न बैंकों, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड, फिक्स डिपॉजिट आदि में करीब एक करोड़ से भी अधिक के निवेश के सुबूत मिले।
विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक, ललित कुमार के खिलाफ लंबे समय से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायतें मिल रही थीं। पहले गोपनीय सत्यापन किया गया। जब प्रारंभिक जांच में आरोपों के समर्थन में सामग्री मिली तो विशेष अदालत से सर्च वारंट लिया गया। इसके बाद एक साथ कई ठिकानों पर कार्रवाई शुरू हुई। शुरुआत में जांच सामान्य तलाशी जैसी थी, लेकिन जल्द ही अधिकारियों को समझ आ गया कि मामला साधारण नहीं है।
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि घर में कई जगह ऐसी संरचनाएं बनाई गई थीं जिनका सामान्य उपयोग नहीं था। बेड के भीतर विशेष खांचे। सोफे के अंदर छिपे बॉक्स। फॉल्स सीलिंग में बने बंद चेंबर। दीवारों के भीतर सीक्रेट लॉकर। स्टोर रूम में अलग कैविटी। हर नई जगह खुलने के साथ कथित तौर पर नकदी, सोना या दस्तावेज मिलने लगे। जांच अधिकारियों के मुताबिक, सामान्य नजर से इन स्थानों का पता लगाना लगभग असंभव था।
इन संपत्तियों के मिले दस्तावेज
- सी-143, सेक्टर-ई, अलीगंज, लखनऊ (आवासीय भवन)
- सी-145, सेक्टर-ई, अलीगंज, लखनऊ (आवासीय भूखण्ड)
- खसरा नं-1321, मोहल्ला भरावन कला, बालकगंज, लखनऊ (आवासीय भूखण्ड)
- 532/491 बनारसी टोला, अलीगंज, लखनऊ (आवासीय भवन)
- 1631, कल्ली पश्चिम, मोहनलालगंज, लखनऊ (आवासीय भूखण्ड)
- मोहनलालगंज चौरहिया, लखनऊ में कृषि भूमि
- ग्राम बेगरिया मोहनलालगंज में कृषि भूमि
- इस्माइलगंज, लखनऊ में आवासीय भूखण्ड
- 10 सी/40 वृंदावन योजना लखनऊ में आवासीय भूखण्ड
- फ्लैट संख्या-3002 अंसल एपीआई, लखनऊ में बुकिंग
- माहेश्वरी इन्फ्राटेक नोएडा में फ्लैट बुकिंग
- आम्रमाली स्प्रिंग मीडो, नोएडा में फ्लैट बुकिंग
- ग्राम जीतपुरवा जनपद बाराबंकी में कृषि भूमि
- एक अन्य-ग्राम जीतपुरवा जनपद बाराबंकी में कृषि भूमि
- ग्राम सहगो कोठी नूर मार्केट रायबरेली में कृषि भूमि
जहां पोस्टेड रहे, आरोप लगे
ललित कुमार परिवहन विभाग के रिटायर्ड एआरटीओ हैं। कानपुर में तैनाती के दौरान वैध आय (93.26 लाख रुपये) से 68.66 लाख रुपये अधिक खर्च करने पर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने जांच शुरू की थी। इसके बाद जून 2022 में उन्हें आगरा का एआरटीओ बनाया गया, जहां दो साल के कार्यकाल के दौरान भी उन पर आय से अधिक संपत्ति जुटाने का मामला सामने आया।
आगरा में पांच साल रही पोस्टिंग
आगरा में पांच वर्ष तक सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) प्रवर्तन के पद पर तैनात रहे ललित कुमार का कार्यकाल विवादों के कारण चर्चा में रहा। चालकों से कथित वसूली, वाहन चेकिंग के दौरान झगड़े और सैयां टोल प्लाजा पर हुए विवाद समेत कई मामलों में उनके खिलाफ शिकायतें सामने आती रहीं लेकिन किसी भी मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सेवानिवृत्त होने के बाद बुधवार को विजिलेंस की टीम की छापेमारी में लखनऊ स्थित आवास से सोने-चांदी के जेवर और करोड़ों की नकदी बरामद होने से ललित कुमार एक बार फिर चर्चा में आ गए।
ललित कुमार अक्तूबर 2020 में कानपुर से स्थानांतरित होकर आगरा आए थे। इससे पहले वह कानपुर में आरआई (संभागीय परिवहन निरीक्षक) के पद पर तैनात थे। आगरा में उन्होंने अक्तूबर 2020 से अक्तूबर 2025 तक एआरटीओ प्रवर्तन के रूप में कार्य किया। आगरा से ही वह सेवानिवृत्त हुए थे। इस दौरान उनका नाता विवादों से बना रहा। वाहन चेकिंग अभियानों के दौरान चालकों से विवाद, कथित अवैध वसूली के आरोप और टोल प्लाजा पर हुए विवाद जैसे मामले समय-समय पर सुर्खियों में रहे। परिवहन विभाग को उनके खिलाफ कई शिकायतें भी मिलीं।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 10 July 2026 at 14:41 IST