अपडेटेड 27 January 2026 at 10:02 IST
UP: अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में इस्तीफा देने वाले बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री सस्पेंड, कमिश्नर करेंगे मामले की जांच
उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को उनके इस्तीफे और लगाए गए आरोपों के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को उनके इस्तीफे और लगाए गए आरोपों के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शासन के विशेष सचिव स्तर से जारी आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया उनके आचरण से प्रशासनिक अनुशासन प्रभावित हुआ है। निलंबन अवधि में उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा, जबकि जांच पूरी होने तक वे शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध रहेंगे। इस विभागीय जांच की कमान बरेली मंडल के आयुक्त को सौंपी गई है।
यह कार्रवाई सोमवार को अलंकार अग्निहोत्री द्वारा इस्तीफा देने और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाने के ठीक बाद हुई। उन्होंने दावा किया कि जिलाधिकारी आवास पर उन्हें करीब 45 मिनट तक जबरन रोका (बंधक) गया। बातचीत के बहाने उन्हें वहां बिठाए रखा गया और मानसिक दबाव बनाया गया। उन्होंने लखनऊ से आए एक फोन कॉल का जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर कहा गया, "ब्राह्मण के बहुत दिमाग खराब हो रहे हैं, इसे यहीं बिठा लो।" अग्निहोत्री ने कहा कि जान बचाकर वे वहां से निकले। इन आरोपों ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
प्रशासन का खंडन: आरोप बेबुनियाद, सामान्य बैठक थी
जिला प्रशासन ने अलंकार अग्निहोत्री के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह ने स्पष्ट किया कि सिटी मजिस्ट्रेट को सामान्य प्रशासनिक चर्चा के लिए बुलाया गया था। बैठक में एडीएम प्रशासन, एडीएम सिटी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और वे खुद मौजूद थे। सिंह ने कहा, "बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई।
उन्हें चाय-कॉफी और मिठाई दी गई। किसी प्रकार का दबाव, धमकी या बंधक बनाने जैसी कोई घटना नहीं हुई।" उन्होंने जोर देकर कहा कि डीएम आवास पर किसी को जबरन नहीं रोका गया; सिर्फ उनके करियर और स्थिति को समझाने की कोशिश की गई। प्रशासन के अनुसार, सभी आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत हैं।
सरकारी आवास छोड़ गायब हुए अलंकार
विवाद के बीच एक नया मोड़ आया जब इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने आधी रात करीब 12:30 बजे सरकारी आवास से अपना अधिकांश सामान हटवा लिया। वे खुद कार से किसी अज्ञात जगह चले गए। हालांकि, प्रशासनिक नियमों के तहत उन्हें अभी सिटी मजिस्ट्रेट का विधिवत चार्ज हैंडओवर करना बाकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि एक-दो दिन और उन्हें बरेली में रुकना पड़ सकता है, ताकि औपचारिकताएं पूरी हों।
इस्तीफे के पीछे बड़े मुद्दे: यूजीसी नियमों और शंकराचार्य घटना पर नाराजगी
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पांच पेज के इस्तीफा पत्र में प्रशासनिक विवाद को ही नहीं, बल्कि कई सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने यूजीसी के नए नियमों को सामान्य वर्ग, खासकर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और भूमिहार समाज के छात्रों के भविष्य के लिए खतरा बताया। उनका आरोप था कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को संदिग्ध या अपराधी जैसा मानते हैं।
पत्र में उन्होंने माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की चोटी खींचे जाने और कथित मारपीट का भी जिक्र किया। अग्निहोत्री ने खुद को ब्राह्मण बताते हुए कहा कि चोटी-शिखा ब्राह्मणों और साधु-संतों की सांस्कृतिक पहचान है। ऐसी घटनाएं समाज का अपमान हैं और सरकार की असंवेदनशीलता दर्शाती हैं। उन्होंने केंद्र-राज्य सरकारों पर डिवाइड एंड रूल की नीति अपनाने का आरोप लगाया, यूजीसी नियमों को अंग्रेजी राज की तुलना में रखा और इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने ब्राह्मण और सामान्य वर्ग के जनप्रतिनिधियों पर चुप्पी साधने का भी इल्जाम लगाया, जिससे समाज उपेक्षित महसूस कर रहा है।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 27 January 2026 at 10:02 IST