अपडेटेड 20 January 2026 at 18:52 IST
IIT Student Suicide: आईआईटी कानपुर के PHD स्टूडेंट ने किया सुसाइड, छठी मंजिल से छलांग लगाकर दी जान; हॉस्टल में पत्नी के साथ रहता था छात्र
Kanpur news : IIT कानपुर परिसर में एक PhD स्कॉलर छात्र ने आत्महत्या करली। छात्र विभाग ऑफ अर्थ साइंस में पीएचडी कर रहा था। परिवार और परिजनों के अनुसार लंबे समय से एंग्जाइटी की समस्या थी।
IIT Kanpur Suicide : मंगलवार (20 जनवरी, 2026) को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के परिसर में एक PhD स्कॉलर छात्र ने आत्महत्या करली। इसके बाद एक बार फिर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। IIT कानपुर जैसे संस्थान में दाखिला लेने के लिए छात्र बहुत कड़ी मेहनत करते हैं। छात्रों के परिवार को भी उनसे अधिक उम्मीदें हो जाती हैं, लेकिन कई बार मानसिक तनाव को झेलना मुश्किल हो जाता है।
विभाग ऑफ अर्थ साइंस में पीएचडी कर रहे 25 वर्षीय छात्र स्वरूप ईश्वराम ने न्यू एसबीआईआर बिल्डिंग की छठी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। छठी मंजिल से कूदने के बाद छात्र को गंभीर चोटें आईं, उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मानसिक रूप से थे परेशान
स्वरूप ईश्वराम मूल रूप से राजस्थान के चूरू जिले के गिरवरसर, विधासर के रहने वाले थे। वे पत्नी के साथ IIT परिसर में ही रहते थे। परिवार और परिजनों के अनुसार, स्वरूप को लंबे समय से एंग्जाइटी (चिंता) की समस्या थी, जिसके कारण वे मानसिक रूप से काफी परेशान रहते थे। सोमवार को उनकी काउंसलिंग भी हुई थी, लेकिन दुर्भाग्यवश यह प्रयास उनकी जान बचा नहीं सका।
इस घटना की सूचना मिलते ही परिसर में हड़कंप मच गया। आसपास के लोगों ने तुरंत IIT प्रशासन और एम्बुलेंस को जानकारी दी। छात्र को IIT की एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे नहीं बच सके।
छात्रों ने पहली भी की आत्महत्या
यह IIT कानपुर में आत्महत्या की पहली घटना नहीं है। 2023 से अब तक यहां करीब 9 ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें ज्यादातर पीएचडी और अन्य उच्च शिक्षा स्तर के छात्र शामिल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शोध के दबाव, अकादमिक तनाव, गाइड-छात्र संबंधों में समस्याएं, वित्तीय दिक्कतें और मानसिक स्वास्थ्य जैसी वजहें इन घटनाओं के पीछे प्रमुख कारण हो सकती हैं।
IIT कानपुर प्रशासन ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है और परिवार के प्रति संवेदना जताई है। संस्थान ने पहले भी छात्रों के लिए काउंसलिंग सेवाओं को बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम चलाने की बात कही है, लेकिन ऐसी घटनाओं की निरंतरता से यह सवाल उठता है कि क्या ये प्रयास पर्याप्त हैं?
आत्महत्या समाधान नहीं
यह घटना न केवल परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि एक चेतावनी भी है। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना और समय पर सहायता उपलब्ध कराना अब बेहद जरूरी हो गया है। अगर कोई व्यक्ति मानसिक तनाव से गुजर रहा हो, तो कृपया मदद लें, भारत में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन (14416 या 1800-599-0019) जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 20 January 2026 at 18:52 IST