अपडेटेड 20 January 2026 at 17:28 IST

Noida Engineer Death: जिस जगह हुई इंजीनियर की मौत, उस पर बनना था खेल का बुनियादी ढांचा, नोएडा अथॉरिटी के अलॉटमेंट के बाद गड़बड़झाला

प्राधिकरण के रिकॉर्ड बताते हैं कि सेक्टर-150 का भूखंड संख्या SC-02 मूल रूप से लोटस ग्रीन को आवंटित किया गया था। बिल्डर को स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर जमीन अलॉट की गई थी।

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site where engineer died was supposed to be used for sports infrastructure Noida Authority
नोएडा अथॉरिटी के अलॉटमेंट के बाद गड़बड़झाला | Image: Republic

Engineer Yuvraj Mehta death case : नोएडा में 27 साल के इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में चौकाने वाले बड़े खुलासे हुए हैं। 7 जुलाई, 2014 को लोटस ग्रीन बिल्डर को स्पोर्ट्स सिटी के नाम पर जमीन अलॉट की गई थी। आरोप है कि जिस जमीन का इस्तेमाल खेलों के बुनियादी ढांचे के लिए होना था, उसे बिल्डर कंपनी ने अलग-अलग लोगों को बेच दिया।

नोएडा के सेक्टर-150 में रहने वाले 27 साल के होनहार इंजीनियर युवराज की मौत का मामला नोएडा प्राधिकरण और बिल्डर कंपनियों की गंभीर लापरवाही की मिसाल बन चुका है। FIR में नामजद दोनों बिल्डर कंपनियों पर नोएडा प्राधिकरण का करीब 3000 करोड़ रुपये का बकाया बताया जा रहा है। सवाल यह है कि जब प्राधिकरण अपना बकाया तक नहीं वसूल पाया, तो इलाके की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करता? इसी लापरवाही का खामियाजा एक निर्दोष युवक को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।

2014 में हुआ अलॉटमेंट

लापरवाही और लालच का ये खेल जिसने 27 साल के इंजीनियर की जान ले ली, आज का नहीं है। ये खेल 2014 से चलता जा आ रहा है। मुनाफा खोर बिल्डर्स को फर्क नहीं पड़ता कि उनके लालच से किसी की जान ही क्यों न चली जाए। प्राधिकरण के रिकॉर्ड बताते हैं कि सेक्टर-150 का भूखंड संख्या SC-02 मूल रूप से लोटस ग्रीन को आवंटित किया गया था। 
करीब 13.29 लाख वर्ग मीटर के इस विशाल भूखंड के 2014 के बाद 24 सब-डिवीजन कर दिए गए। मुनाफे के लिए लोटस बिल्डर ने जमीन के छोटे-छोटे हिस्से अन्य बिल्डरों को बेच दिए।

इस सब के बीच में सबसे दुखद बात ये रही कि जो जमीन मॉल बनाने के लिए अलॉट की गई थी उसपर कभी मॉल का प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हुआ, बल्कि उस जमीन पर पिछले 10 साल से बारिश और आसपास की हाउसिंग सोसाइटियों से निकलने वाले गंदे पानी के जमाव से एक तालाब बन गया।

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9 अक्तूबर, 2023 को गाजियाबाद स्थित सिंचाई विभाग के कंस्ट्रक्शन डिवीजन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने नोएडा अथॉरिटी के सीनियर मैनेजर को पत्र लिखा था। पत्र से खुलासा हुआ कि 2015 से 2023 के बीच इस मुद्दे पर कई बार बातचीत हुई, लेकिन फिर भी कुछ नहीं किया गया। पत्र में विकसित हो रहे सेक्टरों से बारिश के पानी को हिंडन नदी में मोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया गया था।

फाइलों तक सीमित योजना

चौंकाने वाली बात यह है कि 2015 में सिंचाई विभाग द्वारा तैयार की गई बारिश के पानी के मैनेजमेंट की योजना कई सर्वे और साइट इंस्पेक्शन के बावजूद सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रह गई। नोएडा अथॉरिटी के सूत्रों के मुताबिक 2015 में सिंचाई विभाग ने हिंडन नदी में पानी मोड़ने के लिए एक हेड रेगुलेटर बनाने का प्रस्ताव रखा था। फरवरी 2016 में इस काम के लिए नोएडा अथॉरिटी ने सर्वे और डिजाइन तैयार करने के लिए 13.5 लाख रुपये भी जारी किए, लेकिन हालात जस के तस रहे।

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यह मामला सिर्फ नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी का भी संकेत देता है। जिस जगह युवरात की मौत हुई उस जगह इतना बड़ा तालाब था इस बात की जांच आज तक नहीं की गई थी। सवाल ये है कि नोएडा प्राधिकरण ने अब तक कोई सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए थे? सालों से खाली पड़ी जमीन का मुआयना करना क्या प्रधिकरण की जिम्मेदारी नहीं है और अगर बारिश का पानी जमीन में इकट्ठा हो रहा था, तो आज तक इसको लेकर कोई कदम क्यों नहीं उठाए गए?

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 20 January 2026 at 17:28 IST