अपडेटेड 3 March 2026 at 15:02 IST

खामेनेई की मौत के बाद सुर्खियों में बाराबंकी का ये गांव, जहां से जुड़ी हैं उनके गुरु खुमैनी की जड़ें; क्या कह रहे हैं उनके वंशज?

Ali Khamenei: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का बाराबंकी के इस गांव से सीधा कनेक्शन नहीं है। उनके गुरु अयातुल्ला खुमैनी का यहां से रिश्ता है। खुमैनी के दादा सैयद अहमद मुसावी हिंदी 18वीं-19वीं शताब्दी के दौरान बाराबंकी के इसी गांव में रहते थे।

Follow :  
×

Share


अली खामेनेई के गुरु का बारांबकी से कनेक्शन | Image: X

Ali Khamenei news: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत से उत्तर प्रदेश के बाराबंकी का एक गांव ऐसा है, जहां गम और गुस्से का माहौल है। जबसे उनके निधन की खबर आई है, तब से सिरौलीगौसपुर के किंतूर गांव में मातम पसरा है। दरअसल, इस गांव से खामेनेई का खास नाता था। खामेनेई के गुरु रूहोल्लाह खुमैनी के पूर्वज बाराबंकी के किंटूर गांव से जुड़े बताए जाते हैं।

खुमैनी के दादा का गांव से नाता 

स्थानीय लोगों के मुताबिक खामेनेई का सीधा ताल्लुक इस गांव से नहीं है, लेकिन उनके गुरु अयातुल्ला खुमैनी का यहां से रिश्ता है। उनके दादा सैयद अहमद मुसावी हिंदी 18वीं-19वीं शताब्दी के दौरान बाराबंकी के इसी गांव में रहते थे। साल 1830 के आसपास वे किंतूर गांव से ईरान चले गए। वह ईरान के खुमैनी शहर में बसे और फिर वहीं के होकर रह गए। समय बदला और उसके साथ परिस्थितियां भी बदल गईं, लेकिन आज भी गांव के लोग उस पारिवारिक विरासत और ऐतिहासिक जुड़ाव को याद करते हैं।

खुमैनी ईरान के पहले सुप्रीम लीडर बने। उनकी मौत के बाद साल 1989 में खामेनेई ईरान के दूसरे सर्वोच्च नेता चुने गए थे। कहा जाता है कि ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति में इस गांव के वंशजों की भागीदारी रही।

कहा जाता है कि खुमैनी के पिता सैयद मुस्तफा मुसवी भी भारत से जुड़े रहे। ईरान में बस जाने के बावजूद उनका परिवार अपने नाम के साथ ‘हिंदी’ शब्द का इस्तेमाल करता था, जो उनके भारतीय मूल की पहचान को दिखाता था।

अब कैसे हैं हालात? 

स्थानीय निवासी यह भी बताते हैं कि किंतूर गांव में कभी ‘खुमैनी’ या ‘मुसवी’ खानदान के 550 घर हुआ करते थे। इनको ‘सैयदवाड़ा’ के नाम से भी जाना जाता था। हालांकि समय के साथ अधिकतर परिवार अन्य जगहों पर जाकर बसते चले गए। अब यहां केवल पांच से सात घर ही बचे हैं। तब भी इस वंश का नाम इलाके में सम्मान से लिया जाता है।

बताया ये भी जाता है कि लखनऊ के करामत हुसैन मुस्लिम गर्ल्स डिग्री कॉलेज की स्थापना में इस परिवार की है। खामेनेई की मौत और ईरान में मौजूदा हालात के बीच किंतूर गांव का यह संबंध एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

यह भी पढ़ें: सालों की प्लानिंग, ट्रैफिक कैमरे हैक, हर हरकत पर नजर... इजरायल के मोसाद ने खामेनेई के खात्मे का यूं तैयार किया था मास्टप्लान

Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 3 March 2026 at 15:02 IST