TMC सांसद महुआ मोइत्रा की बढ़ी मुश्किलें, हेट स्पीच को लेकर कोर्ट ने जारी किया अरेस्ट वारंट, क्या है पूरा मामला?
नादिया कोर्ट ने हेट स्पीच मामले में टीएमसी की महुआ मोइत्रा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अदालत द्वारा बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद जब सांसद पेश नहीं हुईं, तो न्यायाधीश ने यह कड़ा रुख अपनाया।
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टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की कानूनी मुश्किलें लगातार गहराती जा रही हैं। कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़े एक मामले में पश्चिम बंगाल के नादिया जिले की एक स्थानीय अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। अदालत द्वारा बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद जब सांसद पेश नहीं हुईं, तो न्यायाधीश ने यह कड़ा रुख अपनाया।
समन की लगातार अनदेखी के बाद अदालत की कार्रवाई
सहायक लोक अभियोजक शिरशेंदु दास ने इस पूरी कानूनी कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि कृष्णानगर स्थित सीजेएम जिला एवं सत्र न्यायालय ने सांसद को सुनवाई के लिए तीन बार समन जारी किया था। हालांकि, महुआ मोइत्रा किसी भी तारीख पर अदालत के सामने पेश नहीं हुईं।
मामले की प्रक्रिया के अनुसार 18 जून उनके लिए उपस्थित होने का अंतिम दिन तय किया गया था, लेकिन वह गैरहाजिर रहीं। इसके बाद, 19 जून को न्यायालय ने उन्हें एक विशेष अवसर देते हुए पुनः पेश होने का मौका दिया, किंतु सांसद फिर भी अदालत में उपस्थित नहीं हुईं। इस निरंतर अनुपस्थिति को देखते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय की तीसरी अदालत के न्यायाधीश दिब्येंदु दास ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दे दिया।
जानें क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला सांसद द्वारा दिए गए एक बयान से शुरू हुआ था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 12 जून को महुआ मोइत्रा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, देश के युवाओं और भारतीय सैनिकों को लेकर आपत्तिजनक एवं विवादित बयान दिए थे। इस टिप्पणी के विरोध में बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपना आक्रोश व्यक्त किया था। इसके पश्चात, 17 जून को कृष्णानगर न्यायालय के समक्ष उनके खिलाफ औपचारिक याचिका दायर की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिल सकी थी राहत
यह ध्यान देने योग्य है कि इस महीने की शुरुआत में महुआ मोइत्रा को देश की सर्वोच्च अदालत से भी कोई राहत नहीं मिल सकी थी। उन्होंने एक विवादित फेसबुक पोस्ट के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी की जांच में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होने की अनुमति मांगते हुए याचिका दायर की थी। सांसद का तर्क था कि यदि वह व्यक्तिगत रूप से जांच अधिकारी के समक्ष पेश होती हैं, तो उन पर अंडे फेंके जाने का खतरा है।
'गोलियों से नहीं डरे स्वतंत्रता सेनानी, तो राजनेता अंडे से क्यों डरें'
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने मोइत्रा की इस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी की थी। न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन और राजनीति में कदम रखता है, तो उसे ऐसी परिस्थितियों का सामना करने से नहीं डरना चाहिए। पीठ ने याद दिलाया कि भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की लड़ाई में गोलियों का सामना किया था, ऐसे में आज के राजनेताओं को केवल अंडे फेंके जाने के डर से जांच एजेंसियों के सामने पेश होने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 19 August 2026 at 19:48 IST