West Bengal: ममता बनर्जी का एक और किला ढहा, कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने दिया इस्तीफा, संकट में TMC
West Bengal: ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद कई नेताओं ने पार्टी से किनारा कर लिया है। इस बीच अब उनके करीबी और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
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West Bengal Firhad Hakim: 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक के बाद एक लगातार झटके लग रहे हैं। पार्टी में टकराव और टूट के बीच ममता के करीबी और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और करारा झटका लगा है।
फिरहाद हकीम ने उस समय इस्तीफा दिया है, जब तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायकों के एक गुट ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और नेता विपक्ष के पद के लिए ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन देने का समर्थन पत्र सौंपा। ऐसे में ममता बनर्जी चौतरफा मार झेल रही हैं।
फिरहाद हकीम ने मेयर पद से दिया इस्तीफा
ममता के करीबी और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने अपने पद से उस समय इस्तीफा दिया है, जब ममता बनर्जी की ओर से शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के तौर पर नामित किया गया था, लेकिन टीएमसी के बागी विधायकों के एक गुट ने 58 विधायकों के समर्थन के साथ ऋतब्रत बनर्जी का साथ देने का दावा किया। वहीं, पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि फिरहाद हकीम ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी से इस्तीफा देने की अनुमति मांगी थी क्योंकि भाजपा सरकार उनके काम में बाधा डालने की कोशिश कर रही थी।
टीएमसी ने क्या कहा?
TMC नेता कुणाल घोष ने फिरहाद हाकिम के मेयर पद से इस्तीफा देने पर कहा,"वह सम्मानजनक एग्जिट चाहते हैं, क्योंकि राज्य सरकार निगम को भंग कर रही है। अब तक ममता बनर्जी ने उन्हें यह अनुमति नहीं दी थी। हालांकि, आज की बैठक के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि निगम वास्तव में भंग हो चुका है। हमारी नेता ममता बनर्जी ने आज उन्हें इस्तीफा देने की अनुमति दे दी है, यह देखते हुए कि राज्य सरकार ने निगम को प्रभावी रूप से भंग कर दिया है।'
इस्तीफे पर क्या बोली बीजेपी?
फिरहाद हकीम के इस्तीफे बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा 'दावत-ए-इस्लामी के प्रमुख संरक्षक फिरहाद हकीम, जिन्होंने कभी पश्चिम बंगाल को "पाकिस्तान" बनाने की बात कही थी और उर्दू को राज्य की प्राथमिक भाषा बनाने की वकालत की थी, ने कोलकाता के महापौर पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल तुष्टिकरण की राजनीति का सबसे बुरा उदाहरण था। उनके जाने से कोलकाता के नागरिक प्रशासन के एक बेहद विभाजनकारी अध्याय का अंत हो गया है। अच्छा हुआ कि उनका जाना तय है।'
Published By : Sahitya Maurya
पब्लिश्ड 3 June 2026 at 21:07 IST