'इस देश का नाम किसी देवी या देवता के नाम पर नहीं है, फिर संसद में वंदे मातरम क्यों...', BJP के आरोपों पर असदुद्दीन ओवैसी की आई सफाई
वंदे मातरम के मुद्दे पर AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘संसद सभी धार्मिक समूहों के मिलन का स्थान है, और वहां यह गीत उचित नहीं हो सकता।‘
हैदराबाद से सांसद और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर टिप्पणी की है। बीजेपी के आरोपों का पलटवार करते हुए ओवैसी ने कहा कि संसद सभी धार्मिक समूहों के मिलन का स्थान है, और वहां यह गीत उचित नहीं हो सकता है। इससे पहले ओवैसी ने कहा था कि वंदे मातरम यह एक देवी की स्तुति है, इसे राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता है। ओवैसी के इस बयान पर पलटवार करते हुए BJP ने कहा था कि वंदे मातरम का विरोध करने वाले बौद्धिक रूप से बेईमान और नालायक हैं।
वंदे मातरम के मुद्दे पर AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘संसद सभी धार्मिक समूहों के मिलन का स्थान है, और वहां यह गीत उचित नहीं हो सकता। जब संविधान बनाया जा रहा था, तब संविधान सभा में एक सदस्य थे जिन्होंने कहा था कि प्रस्तावना की शुरुआत किसी देवी के नाम से होनी चाहिए।’
इस देश का कोई धर्म नहीं है-ओवैसी
ओवैसी ने आगे कहा, ‘इस देश का नाम किसी देवी या देवता के नाम पर नहीं रखा गया है, है ना? यह किसी एक समुदाय के नाम पर नहीं चलता। इस देश का कोई धर्म नहीं है और न ही यह किसी एक देवी या देवता की मिल्कियत है। यह देश सभी धर्मों का सम्मान करता है। इस देश की सबसे बड़ी खासियत और खूबसूरती ये है कि ये उन्हें भी मानता है, जो किसी देवा देवता को नहीं मानते हैं। इस आधार पर मैंने कहा है कि वंदे मातरम को राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता है।’
ओवैसी के बयान पर BJPने जताई आपत्ति
बता दें कि ओवैसी के वंदे मातरम को लेकर कई गई टिप्पणी पर BJP ने कड़ी आपत्ति जताई है। BJP के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने कहा कि वंदे मातरम 150 साल से भी ज्यादा समय से स्वतंत्रता सेनानियों की एक घोषणा रहा है। यह अंग्रेजों के खिलाफ एक नारे जैसा था। जो लोग वंदे मातरम के खिलाफ हैं, वे बौद्धिक रूप से बेईमान हैं। वंदे मातरम का उच्चारण करना सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि भारत के नागरिकों के लिए गर्व का विषय है।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 9 May 2026 at 20:27 IST