SIR विवाद और सवालों से घिरे चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से नकारा, कहा- एसआईआर ऑर्डर एकमत से जारी हुआ, सपा बोली- दबाव में हुई बैठक
चुनाव आयोग की शनिवार को हुई अहम बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू और विवेक जोशी भी शामिल हुए। साथ ही SIR को लेकर विपक्ष के सारे आरोपों का सिरे से खारिज कर दिया।
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अंदरूनी टकराव की खबरों और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठे विवाद के बीच शनिवार को चुनाव आयोग की एक अहम बैठक हुई। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू और विवेक जोशी भी शामिल हुए। इस दौरान आयोग ने पारदर्शिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।बैठक के बाद जारी प्रेस नोट में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि भविष्य में सभी बैठकों का एजेंडा पहले से जारी किया जाएगा।
बैठकों से जुड़ी हर तरह की जानकारी भी सार्वजनिक की जाएगी। प्रेस नोट में यह भी कहा गया कि आयोग के पिछले तमाम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और कहीं कोई आंतरिक टकराव नहीं है। इस बयान के जरिए आयोग ने SIR विवाद को लेकर विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इस बीच भाजपा ने चुनाव आयोग के इस बयान का हवाला देते हुए कांग्रेस पर पलटवार किया।
राहुल गांधी के आरोप बेबुनियाद और शर्मनाक-रवि शंकर
भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कहा, "एक अखबार की मीडिया रिपोर्ट के आधार पर विपक्षी दल विशेष रूप से कांग्रेस और विशेष रूप से राहुल गांधी जिस तरह का बेबुनियाद और शर्मनाक आरोप चुनाव आयोग पर लगा रहे हैं, ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी हम निंदा करते हैं। आज चुनाव आयोग ने बकायदा अपना एक प्रेस नोट जारी किया है। जो बैठक आज हुई थी, उसमें चुनाव आयोग के तीनों कमिश्नर साथ मौजूद थे, जो इस न्यूज रिपोर्ट का हिस्सा हैं। इसमें कहा गया है कि जितने फैसले SIR को लेकर हुए वो सभी चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव कमिश्नरों की सहमति से हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने SIR की प्रक्रिया को उचित माना
रवि शंकर प्रसाद ने आगे कहा "दूसरी बात ये कही गई है कि 24.06.2025 को सारे प्रदेशों में इसकी शुरूआत हुई। पहले बिहार से, पश्चिम बंगाल और 30 अन्य प्रदेशों में कार्रवाई हुई है। चुनाव आयोग ने इस बात का विशेष उल्लेख किया कि 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने SIR की ये पूरी प्रक्रिया को उचित माना है। सुप्रीम कोर्ट में पूरी SIR की प्रक्रिया को चुनौती देने कौन लोग गए थे? कांग्रेस पार्टी गई थी, CPI(M) गई थी, TMC ने तो दर्जनों केस किए थे।"
"ममता बनर्जी की सरकार वहां(पश्चिम बंगाल) साफ हो गई। इसी SIR को केरलम की कांग्रेस ने सही माना कि उसके कारण उन्हें जीत मिली है... राहुल गांधी से पहला सवाल है कि आपने झूठ बोला क्यों? चुनाव आयोग ने दूध का दूध और पानी का पानी स्पष्ट कर दिया है।"
ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दे देना चाहिए- सपा सांसद
विपक्ष अभी चुनाव आयोग के बयान से संतुष्ट नहीं है। सपा सांसद सनातन पांडे ने ECI विवाद पर कहा, "उसके(चुनाव आयोग के) दो सदस्यों ने जो बयान दिया है, उन्होंने मानवता को स्वीकार करते हुए, लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास करते हुए, भारत का संविधान अक्षुण रहे, उसके लिए ये बयान दिया था। आज की बैठक सत्ता पक्ष के दबाव में हुई है... दबाव तो रहेगा। जब नियुक्ति ही निष्पक्ष नहीं हुई तो सरकार का दबाव रहेगा ही... इनको(ज्ञानेश कुमार) अगर भारत से लगाव है तो उन्हें इस्तीफा देकर अपनी बात रखने का काम करना चाहिए।"
भाजपा ने SIR का बहाना किया-सनातन पांडे
उन्होंने आगे कहा, "SIR एक नया शब्द आया। चुनाव लड़ने वालों की भी ये जिम्मेदारी होती है कि उनका वोट न कटे और दूसरों का फर्जी वोट ना बढ़े। इस पर आप आरोप न लगा सकें, इतना दिमाग न लगा सकें, इसलिए भाजपा ने SIR का बहाना किया। उसका मूल था विपक्ष के मतों को घटाना। 2004 को बीते आज 22 साल हो गए...SIR से पहले जिन लोगों ने हिंदुस्तान में बहुमत पाई है, वह बहुमत उन्हीं मतों के बदौलत है जिनके वोट काटे गए हैं... पहले भाजपा की सरकार को, देश के प्रधानमंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए था। उसके बाद SIR करवाना चाहिए था और उसके बाद लोकसभा व विधानसभा के चुनाव करवाने चाहिए थे...ये लोग यदि अपने द्वारा परिभाषित शब्दों का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करते रहेंगे तो ये देश बहुत दिनों तक बर्दाश्त नहीं करेगा... लोकतांत्रिक व्यवस्था में क्या होता है आपने श्रीलंका में देखा, बांग्लादेश में देखा और नेपाल में देखा। आपने हाल ही में छात्रों को भी देखा... यह 'हिटलरशाही' नहीं है। ये देश लोकतंत्र से चलेगा। "
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 27 September 2026 at 00:07 IST