Maharashtra: ठाणे मध्यवर्ती सहकारी बैंक के अध्यक्ष पद पर BJP-शिवसेना महायुति का कब्जा, रविंद्र चव्हाण और एकनाथ शिंदे की रणनीति फिर लाई रंग

ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के संचालक मंडल के चुनाव के बाद अब अध्यक्ष पद के चुनाव में भी भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक रवींद्र चव्हाण तथा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की राजनीतिक रणनीति का असर स्पष्ट रूप से देखने को मिला।

 
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रविंद्र चव्हाण और एकनाथ शिंदे की रणनीति | Image: X

ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के संचालक मंडल के चुनाव के बाद अब अध्यक्ष पद के चुनाव में भी भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक रवींद्र चव्हाण तथा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की राजनीतिक रणनीति का असर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा-शिवसेना महायुति ने निर्णायक जीत दर्ज करते हुए बैंक की कमान अपने हाथ में ले ली।

गौरतलब है कि बैंक की कार्यकारिणी के चुनाव में सहकार पैनल और परिवर्तन पैनल के बीच सीधा मुकाबला था। वर्षों से बैंक पर बने बहुजन विकास आघाड़ी के प्रभाव को समाप्त करने के उद्देश्य से रवींद्र चव्हाण और एकनाथ शिंदे ने भाजपा और शिवसेना के उम्मीदवारों को दोनों पैनलों से चुनाव मैदान में उतारा था। चुनाव परिणामों में दोनों पैनलों को मिलाकर भाजपा-शिवसेना महायुति के 14 उम्मीदवार विजयी हुए। इसके बाद अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

रविंद्र चव्हाण और एकनाथ शिंदे की रणनीति लाई रंग

अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा-शिवसेना महायुति के 14 और बहुजन विकास आघाड़ी के 7 सदस्यों ने मतदान किया। चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कार्यकारिणी चुनाव में अलग-अलग पैनलों से मैदान में उतरे भाजपा नेता किसन कथोरे और कपिल पाटील अध्यक्ष पद के चुनाव में एकजुट दिखाई दिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रवींद्र चव्हाण की संतुलित और प्रभावी राजनीतिक रणनीति का परिणाम है। वहीं, दूसरी ओर शिवसेना का एक वोट टूटने से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को हल्का राजनीतिक झटका जरूर लगा।

महायुति गठबंधन की बड़ी जीत

यह महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की एक और बड़ी जीत मानी जा रही है। क्योंकि अब सहकारिता राजनीति में भी महायुति की मजबूती दिख रही है। ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक पर पिछले कई वर्षों से हितेंद्र ठाकूर के नेतृत्व वाली बहुजन विकास आघाड़ी का प्रभाव रहा है। इस बार बैंक की सत्ता में बदलाव के उद्देश्य से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और रवींद्र चव्हाण के नेतृत्व में महायुति ने अपनी रणनीति के तहत दोनों पैनलों में उम्मीदवार उतारे।

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Published By : Ankur Shrivastava

पब्लिश्ड 13 July 2026 at 09:03 IST