अपडेटेड 6 February 2026 at 13:43 IST
'आपको कितने वोट मिले? पॉपुलैरिटी हासिल करने के लिए...', सुप्रीम कोर्ट से PK को फटकार, बिहार चुनाव के नतीजों पर उठाए थे सवाल
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा कि उनकी पार्टी को कितने वोट मिले थे। कोर्ट ने याचिका को लेकर जनसुराज पार्टी को पहले हाईकोर्ट जाने को कहा है। इसके बाद पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली।
SC on Prashant Kishor petition: शुक्रवार, 6 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर की उस याचिका को सुनने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव रद्द करने और फिर से चुनाव कराने की मांग की है। कोर्ट ने पीके की पार्टी से सवाल किया कि आपकी राजनीतिक पार्टी को कुल कितने वोट मिले? इस दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि लोग आपको नकार देते हैं और फिर आप लोकप्रियता बटोरने के लिए कोर्ट आ गए।
कोर्ट ने याचिका को लेकर जनसुराज पार्टी को पहले हाईकोर्ट जाने को कहा है। इसके बाद पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली।
PK की पार्टी की याचिका पर कोर्ट में सुनवाई
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि याचिका में पूरे चुनाव को चुनौती दी गई है, जिस पर वह सुनवाई नहीं कर सकता है। CJI ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, "आपकी राजनीतिक पार्टी को कितने वोट मिले? लोग आपको नकारते हैं और फिर आप लोकप्रियता हासिल करने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल करते हैं।"
CJI ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को मुफ्त योजनाओं को चुनौती देनी चाहिए थी, जिस पर वकील ने कहा कि याचिका में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का मुद्दा उठाया गया है, उस पर विचार किया जा सकता है।
याचिका में उठाई गई थी ये मांग
कोर्ट में जन सुराज पार्टी की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट चंदर उदय सिंह कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया गया। इसके लागू होने के बावजूद महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। चुनाव से ठीक पहले योजना का ऐलान हुआ। याचिका में चुनाव आयोग को ऐसी योजनाएं शुरू करने के लिए सत्ताधारी दल के लिए कम से कम छह महीने की समय सीमा निर्धारित करने का निर्देश देने की मांग की गई, जो चुनाव को प्रभावित कर सकती हैं।
‘अगर ये पार्टी सत्ता में आती है तो…’
इस पर CJI ने कहा कि याचिकाकर्ता ने स्कीम को नहीं चुनाव को चुनौती दी है। इसे रद्द करने की मांग करते हुए फिर से चुनाव कराने की मांग की है। सीजेआई ने यह भी कहा कि फ्रीबीज के मुद्दे को हम गंभीरता से पहले ही देख रहे हैं। इस पर हम विचार करना चाहेंगे, लेकिन उस पार्टी के कहने पर नहीं जो चुनाव हार चुकी है। उन्होंने इस दौरान यह भी कहा कि अगर ये पार्टी सत्ता में आती है तो, ये भी वही करेगी।
पार्टी की इस याचिका में बिहार सरकार की चुनावों से ठीक पहले शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर सवाल उठाए गए हैं। योजना के तहत राज्य ने हर परिवार की एक महिला को स्वरोजगार शुरू करने में मदद के लिए सीधे 10,000 रुपये हस्तांतरित करने का फैसला लिया गया था। साथ ही मूल्यांकन के बाद 2 लाख रुपये देने का भी वादा किया गया।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 6 February 2026 at 13:43 IST