अपडेटेड 21 January 2026 at 22:58 IST

‘हर फ्री चीज मुफ्तखोरी नहीं...’, फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान; CJI ने कहा- इसपर गंभीर विचार की जरूरत

चुनाव के समय की जाने वाली मुफ्त की योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि चुनाव जीतने के लिए मुफ्त सामान बांटने के वादे केवल चुनावी हथकंडे नहीं हैं। यह एक बेहद महत्वपूर्ण मामला है और इसपर विचार होना चाहिए।

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Supreme Court on freebies | Image: ANI

Supreme Court on freebies: चुनाव के समय हम अक्सर राजनीतिक दलों से सुन लेते हैं कि सरकार राज्य या देश को कर्ज के खाई में झोंक कर वोट पाने के लिए मुफ्त की रेवड़ियां बांट रही है। अब इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा बयान दिया है। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि चुनाव जीतने के लिए मुफ्त सामान बांटने के वादे केवल चुनावी हथकंडे नहीं हैं। यह एक बेहद महत्वपूर्ण मामला है और इसपर विचार होना चाहिए। 

दरअसल, बुधवार यानी 21 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में काफी समय से लंबित फ्रीबीज मामले पर सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता और एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने अदालत का ध्यान फ्रीबीज के चलते देश पर बढ़ते कर्ज की ओर दिलाते हुए दलील दी कि देश पर करीब 250 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है और चुनावी फ्रीबीज की होड़ से राज्यों की वित्तीय स्थिति खराब होती जा रही है। 

हर मुफ्त सुविधा ‘फ्रीबीज’ नहीं

CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह मामला नीतिगत निर्णय का विषय हो सकता है, लेकिन यह भी विचार करने की जरूरत है कि क्या राज्य के राजस्व का एक हिस्सा केवल राज्य के विकास कार्यों के लिए सुरक्षित नहीं किया जाना चाहिए? उन्होंने स्पष्ट किया कि मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और बुनियादी सुविधाएं सरकार का संवैधानिक दायित्व हैं, क्योंकि ये नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ी होती हैं। ऐसी योजनाओं को मुफ्तखोरी कहना उचित नहीं होगा।

फ्रीबीज पर गंभीर विचार की जरूरतः CJI

CJI ने कहा कि राज्य की संपदा का वितरण और उसका कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च एक ऐसा मुद्दा है जिस पर गंभीर विचार की आवश्यकता है। अदालत ने कहा कि वह यह तय करेगी कि किन मामलों को तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। अदालत का मानना है कि बिना स्पष्ट दिशा-निर्देशों के यह मुद्दा भविष्य में और जटिल हो सकता है।

जल्द तय होंगे दिशा- निर्देश

कोर्ट ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का फैसला लिया है। उम्मीद है कि सुनवाई के बाद चुनावी फ्रीबीज को लेकर स्पष्ट और व्यावहारिक गाइडलाइंस सामने आएंगी, जिससे लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था दोनों को संतुलन में रखा जा सकेगा। बता दें, इससे पहले भी फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 21 January 2026 at 22:58 IST