SIR Campaign: बिहार की तर्ज पर पूरे देश में अक्टूबर से लागू होगा SIR? चुनाव आयोग ने तेज की तैयारी
विशेष गहन संशोधन (SIR) मतदाता सूची की सटीकता और विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। निर्वाचन आयोग का लक्ष्य न केवल मतदाता सूची को शुद्ध करना है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों का विश्वास भी बढ़ाना है।
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बिहार की तर्ज पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) देश भर में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) की शुरुआत करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक निर्वाचन आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से 30 सितंबर तक कागजी कार्रवाई और जरूरी तैयारियां पूरी करने के लिए कहा है।
अधिकांश राज्यों ने सितंबर के अंत तक तैयारी पूरी करने का भरोसा जताया है। आशंका है कि अक्टूबर 2025 से देशभर में SIR शुरू हो सकता है। यह कदम बिहार में हाल ही में किए गए समान संशोधन की सफलता के बाद उठाया जा सकता है, जहां मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए व्यापक सत्यापन किया गया था। 2026 में 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
कहां-कहां होंगे चुनाव ?
- बिहार (नवंबर-दिसंबर तक)
- पश्चिम बंगाल (मार्च-अप्रैल 2026)
- असम (मार्च-अप्रैल 2026)
- तमिलनाडु (मार्च-अप्रैल 2026)
- पुडुचेरी (मार्च-अप्रैल 2026)
- केरल (मार्च-अप्रैल 2026)
SIR क्या है?
विशेष गहन संशोधन (SIR) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची का घर-घर जाकर सत्यापन किया जाता है। मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन का मुख्य उद्देश्य फर्जी वोटर की पहचान कर उन्हें हटाना है। फर्जीवाड़ा कर वोटर लिस्ट में शामिल हुए विदेशियों को हटाना है। इसके अलावा मृत वोटरों को वोटर लिस्ट से हटाना और दूसरी जगह शिफ्ट हुए वोटर की पहचान करना है।
SIR का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र मतदाता का नाम सूची में शामिल हो। बिहार में SIR की प्रक्रिया जून, 2025 में शुरू हुई थी, जिसके तहत लगभग 8 करोड़ मतदाताओं की सूची का सत्यापन किया गया। इस दौरान 64 लाख से अधिक नाम हटाए गए, जिनमें मृतक, स्थाई रूप से स्थानांतरित, दोहरे पंजीकरण वाले या गैर-नागरिक लोगों के नाम शामिल थे।
कैसे काम करती है प्रक्रिया?
SIR के तहत, बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाता का सत्यापन करते हैं। वे पहले से भरे हुए प्रपत्र वितरित करते हैं, जिनमें मतदाता का नाम, पता और दूसरी जानकारी होती हैं। मतदाताओं, विशेष रूप से 2003 के बाद पंजीकृत व्यक्तियों, को अपनी नागरिकता और निवास साबित करने के लिए दस्तावेज जमा करने होते हैं। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी इन दस्तावेजों की जांच करते हैं और मतदाता सूची में शामिल करने या हटाने का फैसला लेते हैं।
बिहार में SIR का विपक्ष ने जमकर विरोध किया है। विपक्षी दलों ने इसे कुछ समुदायों को टारगेट करने का आरोप लगाया। सुप्रीम कोर्ट में भी बिहार SIR के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई हैं, जिसमें इसकी प्रक्रिया और संवैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं। निर्वाचन आयोग ने इन चिंताओं का जवाब देते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी है और इसका उद्देश्य केवल मतदाता सूची की सटीकता को बढ़ाना है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 10 September 2025 at 21:03 IST