अपडेटेड 6 March 2025 at 11:28 IST

PM मोदी के साथ एक मुलाकात के बाद कैसे बदली देश के लिए सोच , रिपब्लिक समिट में वैज्ञानिक डॉ. अर्चना शर्मा ने सुनाया किस्सा

रिपब्लिक प्लेनरी समिट 2025 में CERN वैज्ञानिक डॉ. अर्चना शर्मा ने विज्ञान के क्षेत्र में भारत में आए बदलाव पर अपने राय रखीं।

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Dr. Archana Sharma | Image: Republic

Republic Plenary Summit 2025: साल के सबसे बड़े न्यूज इवेंट रिपब्लिक प्लेनरी समिट 2025 का शानदार आगाज भारत मंडपम पर हुआ। आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर समिट की शुरुआत की। इस शिखर सम्मेलन में अलग-अलग क्षेत्रों की विभिन्न हस्तियां शिरकत कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रिपब्लिक समिट 2025 में चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल होंगे। समिट में CERN वैज्ञानिक डॉ. अर्चना शर्मा ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे बदलाव पर चर्चा की।

 

विज्ञान के क्षेत्र में भारत को लेकर दूसरे देशों में आए बदलाव पर चर्चा करते हुए CERN वैज्ञानिक डॉ. अर्चना शर्मा ने कहा कि 80 के दशक के अंत और 90 के दशक की शुरुआत में विदेशों में भारतीयों की स्थिति दोयम दर्जे के नागरिक जैसी थी। हमारा वास्तव में स्वागत नहीं किया जाता था। हमें वहां उपयोगी व्यक्ति नहीं माना जाता था और यह हमारे लिए एक चुनौती थी जिसे पार करना था, और हम मगर अब यह स्थिति नहीं है।


पीएम मोदी से मुलाकात बाद देश के प्रति बढ़ा जुड़ाव

रिपब्लिक के मंच से पर एक किस्सा सुनाते हुए CERN वैज्ञानिक डॉ. अर्चना शर्मा ने बताया कि एक बार पीएम मोदी जिनेवा दौरे थे। अपने बिजी शेड्यूल में समय निकालकर उन्होंने हमारी टीम से मुलाकात की थी। टीम में शामिल एक-एक बच्चे से उन्होंने मुलाकात की और सबसे पूछा कि आप क्या कर रहे हो? फिर वो मेरे पास आए और मुझसे पूछा अर्चना इनमें से कितने बच्चे भारत वापस जाएंगे। उनका ये सवाल हमारी सोच को भी बदला। वहां से भारत के प्रति मेरा जुड़ाव और बढ़ गया।

कौन है डॉ. अर्चना शर्मा 

बता दें कि अर्चना शर्मा स्विटजरलैंड के जिनेवा में स्थित CERN प्रयोगशाला में विरिष्ठ वैज्ञानिक है. वों 1989 से इस क्षेत्र में अपनी सक्रीय भूमिका निभा रही है। वो पहली भारतीय महिला जो CERN से जुड़ी हैं। डॉ. अर्चना शर्मा ने मुख्य रूप से उपकरणों, विशेषकर गैसीय डिटेक्टरों पर काम कर रही हैं। वे पिछले तीन दशकों से वायर चैंबर, प्रतिरोधक प्लेट चैंबर और माइक्रो-पैटर्न गैसीय डिटेक्टरों पर सिमुलेशन और अग्रणी हैं। रिपब्लिक के मंच से उन्होंने अपनी जर्नी के साथ इस क्षेत्र में आए बदलाव पर भी अपने विचार रखीं। 
 

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 6 March 2025 at 11:28 IST