Raja Ravi Varma Painting: साइरस पूनावाला ने राजा रवि वर्मा की पेंटिंग 167 करोड़ में क्यों खरीदी? क्या है इसकी खासियत

Raja Ravi Varma Yashoda Krishna Painting: आधुनिक भारतीय कला के जनक राजा रवि वर्मा की प्रसिद्ध पेंटिंग 'यशोदा और कृष्ण' ने नीलामी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सीरम इंस्टीट्यूट के साइरस पूनावाला ने इसे 167.2 करोड़ रुपये में खरीदा है।

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Raja Ravi Varma Yashoda Krishna Painting | Image: Social Media

Raja Ravi Varma Yashoda Krishna Painting: आधुनिक भारतीय कला के जनक कहे जाने वाले राजा रवि वर्मा ने हिंदू देवी-देवताओं की छवि को इतनी कुशलता से कैनवास पर उकेरा कि लोगों ने उनकी कल्पना को भगवान का असली चेहरा मान लिया। 1 अप्रैल 2026 को दिल्ली के 'सैफ्रनआर्ट' नीलामी घर की 'स्प्रिंग लाइव सेल' के दौरान उनकी एक विख्यात पेंटिंग ने नीलामी के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। राजा रवि वर्मा द्वारा बनाई गई 'यशोदा और कृष्ण' की अनुपम कृति को 8 मिलियन डॉलर यानी करीब 167.20 करोड़ रुपये में नीलाम किया गया है। 

किसने खरीदी पेंटिंग? 

इस बेशकीमती पेंटिंग को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संस्थापक और उद्योगपति साइरस एस. पूनावाला ने खरीदा है। नीलामी से पहले इस पेंटिंग की कीमत 80 से 120 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन कला प्रेमियों के उत्साह ने इसे उम्मीद से दोगुना दाम पर पहुंचा दिया। इस खरीद के साथ ही 'यशोदा और कृष्ण' ने एम.एफ. हुसैन की प्रसिद्ध पेंटिंग 'ग्राम यात्रा' का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है, जो पिछले साल 118 करोड़ रुपये में बिकी थी। 

हिंदू देवी-देवताओं की पेंटिंग्स को घरों तक पहुंचाया

1848 में त्रावणकोर रियासत के एक उच्च कुल में जन्मे रवि वर्मा की खासियत यह थी कि उन्होंने यूरोपीय तकनीक और भारतीय संवेदनाओं का ऐसा मेल किया कि उनके द्वारा बनाई गई देवी-देवताओं की छवियां ही आज करोड़ों भारतीयों के मन में भगवान का 'असली चेहरा' बन चुकी हैं। उन्होंने ही 1894 में लिथोग्राफिक प्रेस की शुरुआत कर इन दिव्य चित्रों को आम लोगों के घरों तक पहुंचाया था। 

1890 के दशक में, जब वर्मा अपनी कला के शिखर पर थे, तब उनके द्वारा यह शानदार पेंटिंग बनाई गई थी। इस पेंटिंग में माता यशोदा और भगवान कृष्ण की बाल कृष्ण और उनकी मां यशोदा के बीच के अटूट और कोमल प्रेम को कैनवास पर उतारा गया है। 

भारतीय कला बाजार को मिली नई ऊंचाई

सैफ्रनआर्ट के अध्यक्ष मीनल वजीरानी ने इस नीलामी को भारतीय कला बाजार के लिए एक निर्णायक क्षण बताया है। वहीं, साइरस पूनावाला ने भरोसा दिलाया है कि वह इस राष्ट्रीय धरोहर को सिर्फ अपने निजी संग्रह तक सीमित नहीं रखेंगे। उन्होंने कहा कि समय-समय पर इस ऐतिहासिक पेंटिंग को आम जनता और कला प्रेमियों के देखने के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। इससे पहले वी.एस. गायतोंडे की एक पेंटिंग भी 67 करोड़ रुपये में बिकी थी, लेकिन रवि वर्मा की इस कृति ने भारतीय कला बाजार को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है।

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Published By : Shashank Kumar

पब्लिश्ड 2 April 2026 at 16:55 IST