अपडेटेड 19 February 2026 at 08:51 IST

BREAKING: शिवाजी महाराज की जयंती पर शिवनेरी किले में भीड़ हुई बेकाबू, भगदड़ जैसी स्थिति, महिला-बच्चों समेत कई घायल

पुणे के जुन्नर तालुका में स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्मस्थान शिवनेरी किला पर शिवजयंती के मौके पर इस साल भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

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शिवाजी महाराज की जयंती पर शिवनेरी किले में भीड़ हुई बेकाबू, भगदड़ जैसी स्थिति, महिला-बच्चों समेत कई घायल . | Image: Republic

पुणे के जुन्नर तालुका में स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज के जन्मस्थान शिवनेरी किला पर शिवजयंती के मौके पर इस साल भारी भीड़ उमड़ पड़ी। गेट का रास्‍ता पतला होने के चलते भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस दौरान कुछ महिलाएं और छोटे बच्चे गिर पड़े और कई लोग हल्के तौर पर घायल हो गए। घायलों को तुरंत जुन्नर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी की जान नहीं गई है।

जानकारी के मुताबिक लोग हाथी दरवाजा और गणेश दरवाजा से किले के अंदर जा रहे थे। रास्ता संकरा होने से भीड़ जमा हो गई। फिर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घायलों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। चश्मदीदों के मुताबिक, स्थिति कुछ वक्त के लिए काफी तनावपूर्ण हो गई थी। घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन ने घायलों को जुन्नर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया। राहत की बात यह है कि घायलों को मामूली चोटें आई हैं और डॉक्टर उनकी निगरानी कर रहे हैं। आपको बता दें कि शिवाजी जयंती पर हर साल शिवनेरी किले में बड़ी संख्या में लोग आते हैं।

शिवनेरी किले का इतिहास

शिवनेरी किला महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नर शहर के पास स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक किला है। यह किला खासतौर पर इसलिए मशहूर है क्योंकि यहीं पर छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को हुआ था। किले में शिवाई देवी का मंदिर भी है, जिनके नाम पर शिवाजी महाराज का नाम रखा गया था।

किले तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों से होकर जाना पड़ता है। अंदर जाने के सात दरवाजे हैं, जिनमें से हर एक दरवाजे का अपना नाम और महत्व है। किले के अंदर पानी के तालाब, सैनिकों के रहने के स्थान और शिवाजी महाराज के जन्मस्थान को आज भी देखा जा सकता है। मराठा काल के 12 किलों को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है। इनमें महाराष्ट्र के 11 किले हैं। वहीं, तमिलनाडु का एक जिंजी किला भी सूची का हिस्सा है। सभी किले 17वीं से 19वीं सदी के बीच बने थे।

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Published By : Ankur Shrivastava

पब्लिश्ड 19 February 2026 at 08:26 IST