'हम इस फैसले को गलत मानते हैं, क्योंकि...', भोजशाला को हाईकोर्ट ने बताया मंदिर, तो ओवैसी ने जताई आपत्ति; जानें क्या बोले

धार की भोजशाला को हिंदू मंदिर मानने वाले हाईकोर्ट के फैसले पर असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हम इस फैसले को गलत मानते हैं।

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Asaduddin Owaisi | Image: ANI

Owaisi on HC Bhojshala Verdict: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला मामले में शुक्रवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भोजशाला को मां वाग्देवी मंदिर माना। हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें पूरे परिसर में पूजा करने का अधिकार दिया। अब इस फैसले को लेकर AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है।

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष इस फैसले को गलत मानता है। उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि अदालत ने 1935 के धार स्टेट गजट, 1985 के वक्फ रजिस्ट्रेशन को नजरअंदाज किया है।

भोजशाला पर HC के फैसले पर क्या बोले ओवैसी?

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'हम इस फैसले को गलत मानते हैं क्योंकि कोर्ट ने 1935 के धार स्टेट गजट, 1985 के वक्फ रजिस्ट्रेशन को नजरअंदाज किया और साथ ही 'पूजा स्थल अधिनियम' (Places of Worship Act) को भी नजरअंदाज किया। कोर्ट ने मालिकाना हक को लेकर चल रहे दीवानी विवाद के मामले को भी नजरअंदाज किया।'

बाबरी के फैसले जैसी समानताएं- ओवैसी

इससे पहले उन्होंने एक्स पर ट्वीट कर कहा था, 'हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इसे ठीक करेगा और इस आदेश को रद्द कर देगा। इसमें बाबरी मस्जिद के फैसले के साथ स्पष्ट समानताएं दिखाई देती हैं।'

बेंच ने अपने फैसले में क्या कहा?

एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि विवादित परिसर का धार्मिक चरित्र देवी वाग्देवी सरस्वती के मंदिर और संस्कृत अध्ययन केंद्र भोजशाला के रूप में स्थापित होता है। कोर्ट ने यह भी माना कि यहां हिंदू पूजा की निरंतरता कभी खत्म नहीं हुई।

एएसआई सर्वे में मंदिर की दीवारों और खंभों पर देवी-देवताओं की आकृतियां, कलश, घंटियां, कमल, संस्कृत श्लोक और शिलालेख मिलने की बात कही गई। इसके अलावा जमीन के नीचे भी मंदिर से जुड़े प्रमाण मिलने का भी दावा किया गया है।

'वैकल्पिक जमीन की मांग कर सकता है मुस्लिम पक्ष'

बेंच ने 2003 की उस एएसआई आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें हिंदुओं के पूजा अधिकार सीमित थे, जबकि मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति थी। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर मुस्लिम पक्ष चाहता है तो सरकार से मस्जिद के लिए धार या आसपास वैकल्पिक जमीन की मांग कर सकता है। 

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Published By : Priyanka Yadav

पब्लिश्ड 15 May 2026 at 21:01 IST