'विपक्ष ने बड़ी गलती की, अब भुगतना होगा अंजाम, गांव-गांव तक...', महिला आरक्षण बिल गिरने पर PM मोदी का आया पहला रिएक्शन
PM Modi statement: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो पाया। इसे दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला। बिल के गिरने पर पीएम मोदी का पहला रिएक्शन आया। उन्होंने विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताई।
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Women's Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल को लेकर सत्ता पक्ष-विपक्ष में आर-पार की लड़ाई जारी है। लोकसभा में बिल गिरने के बाद एक तरफ विपक्ष इसे लोकतंत्र की जीत बता रहा है। तो वहीं एनडीए की ओर से विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया जा रहा है। वहीं, लोकसभा में बिल के पारित न होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल का समर्थन न करके विपक्ष ने बहुत बड़ा गलती की है।
विपक्ष ने महिलाओं को हराया है- पीएम मोदी
महिला आरक्षण से जुड़े बिल गिरने के बाद शनिवार (18 अप्रैल) को मोदी कैबिनेट की बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी ने बैठक में विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सरकार को नहीं देश की महिलाओं को हराया है। उन्हें इसका अंजाम भुगतना होगा।
'गलती छिपाने के लिए बहाने ढूंढ रहा है विपक्ष'
सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी ने बैठक में इस मुद्दे को जन-जन और गांव गांव तक लेकर जाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की मंशा को जगजाहिर करेगी। अपनी गलती को छिपाने के लिए विपक्ष बहाने और तर्क ढूंढ रहा है।
पीएम मोदी ने बैठक में मंत्रियों और नेताओं को एक कहा कि यह संदेश देश के हर गांव तक पहुंचाया जाए कि विपक्ष की सोच महिलाओं के प्रति नकारात्मक है। यह मुद्दा सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जन-जन तक ले जाना जरूरी है।
वहीं, बिल पास न हो पाने पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को घेरा है। उन्होंने कहा कि हम सभी इस बात से दुखी हैं कि कांग्रेस और विपक्ष ने दो तिहाई बहुमत से संविधान में संशोधन की इजाजत नहीं दी। यह हमारी सरकार या पार्टी के लिए नुकसानदायक नहीं है। हम दुखी हैं कि इससे नुकसान देश की महिलाओं का हुआ है।
बिल को नहीं मिल पाया दो-तिहाई बहुमत
महिला आरक्षण से जुड़े तीन बिलों के लिए मोदी सरकार ने संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था। गुरुवार (16 अप्रैल) को मोदी सरकार ने लोकसभा में इन बिलों को पेश किया और करीब 21 घंटे तक चर्चा भी चली। लंबी बहस के बाद शुक्रवार (17 अप्रैल) को वोटिंग हुई। लोकसभा में बिल के पारित होने के लिए इसके समर्थन में दो तिहाई यानी 352 वोटों की ही जरूरत थी। बिल के समर्थन में 298 वोट, जबकि विपक्ष में 230 वोट पड़े।
बिल पास हो जाता तो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण मिलता। इन बिल में विवाद की जड़ परिसीमन था, जिसका विपक्ष ने विरोध किया।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 18 April 2026 at 13:45 IST