अपडेटेड 12 March 2026 at 11:22 IST

'अब हमेशा के लिए सो जा मेरे लाल', इच्छामृत्यु फैसले के बाद हरीश राणा की मां की ये तस्‍वीर चीर देगी कलेजा; 13 साल के 'दर्द' का ऐसे होगा अंत

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश में पहली बार किसी व्यक्ति को पैसिव इच्छामृत्यु की अनुमति देते हुए एक भावुक और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट के फैसले के बाद हरीश राणा की मां एक तस्वीर सामने आई है, जो बेहद भावुक करने वाली है।

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इच्छामृत्यु फैसले के बाद हरीश राणा की ये तस्‍वीर चीर देगी कलेजा | Image: X

भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने किसी व्यक्ति को इच्छामृत्यु की इजाजत दी। कोर्ट का ऐतिहासिक फैसले आते ही यह खबर आग की तरह फैल गई है। कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा जो 13 साल से ज्यादा समय कोमा में है, को इच्छामृत्यु की अनुमति दी है। कोर्ट ने जैसे ही यह फैसला सुनाया लोग सोशल मीडिया पर हरीश राणा को सर्च करने लगे। इस फैसले पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया भी आ रही है। मगर इन सब के बीच हरीश की मां का बेटे के साथ एक तस्वीर सामने आई है जो लोगों को काफी भावुक कर रही है। तस्वीर ऐसी है जो एक तड़पती हुई मां के दर्द को बयां कर रही हो।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश में पहली बार किसी व्यक्ति को पैसिव इच्छामृत्यु (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति देते हुए एक भावुक और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन के रहने वाले 32 साल के हरीश राणा, जो साल 2013 से स्थायी वेजिटेटिव स्टेट (कोमा जैसी स्थिति) में थे, अब लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की प्रक्रिया से गुजरेंगे। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) को निर्देश दिए कि हरीश को तुरंत भर्ती कर चरणबद्ध तरीके से लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाया जाए, ताकि उन्हें गरिमापूर्ण मृत्यु मिल सके।

तस्वीर ने बयां कि एक मां का दर्द

कोर्ट के फैसले के बाद सामने आई हरीश की मां निर्मला राणा की एक तस्वीर ने लोगों को भावुक कर दिया है। तस्वीर में निर्मला देवी अपने बेटे के सिरहाने बैठी नजर आ रही हैं। आंखों में आंसू भरे, चेहरे पर गहरा दर्द लिए हुए वे बेटे के सिर को प्यार से सहला रही हैं, मानो खामोशी से कह रही हों - "जा बेटा, अब तू सुकून से सो जा।" बता दें कि हरीश राणा को दी गई पैसिव इच्छामृत्यु  की अनुमित उनके माता-पिता की ओर से दायर आवेदन पर दी गई है।


हरीश राणा के कैसे हुई ये हालत

हरीश राणा पंजाब यूनिवर्सिटी में बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। साल 2013 में यूनिवर्सिटी के पास अपनी पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिससे उन्हें शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोट आई है। सिर की चोट की वजह से 100% क्वाड्रिप्लेजिया हो गई। पिछले 13 साल से राणा क्वाड्रिप्लेजिया (चारों अंगों का लकवा) से पीड़ित हैं। वे सांस लेने के लिए ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब और खाने के लिए गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी ट्यूब पर निर्भर हैं। डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे इलाज के बाद भी उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। वे पूरी तरह से मशीनी जीवन रक्षक प्रणाली पर हैं।

माता-पिता ने बड़ा फैसला

AIIMS की मेडिकल रिपोर्ट्स में साफ कर दिया गया था कि उनके ठीक होने की अब कोई संभावना नहीं बची है। इसके बाद मां निर्मला राणा और पिता अशोक राणा ने ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बेटे की इच्छामृत्यु के लिए गुहार लगाई थी। परिवार ने पिछले 13 साल (लगभग 4586 दिन) में हरीश की सेवा में सब कुछ झोंक दिया। मां ने दिन-रात उनकी देखभाल की, हर पल उम्मीद बांधे रखी कि बेटा एक दिन आंखें खोलेगा और बात करेगा। लेकिन जब उम्मीदें बार-बार टूटीं, तो बेटे की असहनीय तकलीफ देखकर यह कठिन फैसला लेना पड़ा।

मेडिकल सपोर्ट बंद कर दी जाएगी मुक्ति

फैसले के बाद परिवार का दिल भारी है। ममता की वजह से मां बेटे को रोकना चाहती हैं, लेकिन उसकी पीड़ा देखकर खुद को समझा रही हैं कि यही उनके लल्ला के लिए सबसे बड़ी राहत होगी। पिता अशोक राणा भी कोर्ट का फैसला सुनते ही भावुक हो गई। 11 मार्च, 2026 को अपने आखिरी फैसले में, जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने राणा के माता-पिता को मेडिकल सपोर्ट बंद करने की इजाजत दी। अब धीरे-धीरे हरीश के शरीर से लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाया जाएगा।

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 12 March 2026 at 11:16 IST