देश में एक और बड़े खतरे की आहट! PMO से लेकर CMO तक अलर्ट, बुलाई हाई लेवल बैठक
देश में मानसून को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने अपनी तैयारियों को परखने के लिए कमर कस ली है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने हाल ही में अल नीनो के संभावित प्रभावों पर एक बड़ी समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें कई अहम मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।
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देश में मानसून को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने अपनी तैयारियों को परखने के लिए कमर कस ली है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने हाल ही में अल नीनो के संभावित प्रभावों पर एक बड़ी समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें कई अहम मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।
बैठक का मकसद साफ था कि मौसम की मार से पहले हर मोर्चे पर तैयारी पुख्ता कर ली जाए, ताकि आम आदमी की रसोई से लेकर किसान के खेत तक कोई असर न पड़े।
आपको बता दें कि अल-नीनो वह स्थिति है जब प्रशांत महासागर का पूर्वी भाग गर्म हो जाता है। इससे भारत में कम बारिश होती है। इस बार अल-नीनो के बढ़ने और ला-नीना के कमजोर पड़ने से देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून की स्थिति अलग-अलग नजर आ रही है।
किन मंत्रालयों ने लिया हिस्सा
इस बैठक में कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक मामलों और उपभोक्ता मामलों जैसे कई अहम विभागों के सचिव मौजूद रहे। हर मंत्रालय ने अपने स्तर पर अब तक हुई तैयारियों का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत किया, जिससे यह साफ हो सके कि किस क्षेत्र में कितना काम हो चुका है और कहां और मेहनत की जरूरत है।
राज्यों संग तालमेल पर जोर
बैठक में सबसे अहम संदेश यही रहा कि अकेले केंद्र सरकार के प्रयास काफी नहीं हैं। इसके लिए राज्य सरकारों को साथ लेकर जमीनी स्तर पर ठोस रणनीति बनाने के निर्देश दिए गए, ताकि योजनाएं कागजों तक सीमित न रहें बल्कि गांव-गांव तक असर दिखाएं।
अल नीनो के असर से सबसे ज्यादा आशंका खेती-किसानी को लेकर जताई जाती है, क्योंकि कमजोर मानसून सीधे फसल उत्पादन को प्रभावित करता है। यही वजह है कि बैठक में साफ कहा गया कि खेती और समूची अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला असर कम से कम हो, इसके लिए स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी जाए।
इसी क्रम में किसानों तक समय पर बीज, खाद और अन्य जरूरी कृषि सामग्री पहुंचाने को सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए, जिससे बुवाई के मौसम में किसानों को किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
आम लोगों की थाली की चिंता
सिर्फ खेत ही नहीं, बैठक में आम उपभोक्ताओं का भी खास ख्याल रखा गया। जरूरी खाद्य वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि मौसम में किसी उतार-चढ़ाव का असर बाजार में जमाखोरी या कीमतों में उछाल के रूप में सामने न आए।
बैठक के अंत में सभी मंत्रालयों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि हालात पर लगातार निगरानी रखी जाए और जरूरत पड़ने पर बिना देरी किए फौरन कदम उठाए जाएं। सरकार का रुख इस बात से भी झलकता है कि यह सिर्फ एक बार की समीक्षा नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में स्थिति के अनुसार लगातार मॉनिटरिंग की प्रक्रिया का हिस्सा है।
Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 7 July 2026 at 22:16 IST