ट्विशा शर्मा की मौत मामले में बड़ी लापरवाही, पोस्टमार्टम के समय AIIMS नहीं भेजी गई थी फांसी वाली बेल्ट; सवालों के घेरे में भोपाल पुलिस

Twisha Sharma Death Mystery: ट्विशा शर्मा की मौत का संदिग्ध मामला उलझता जा रहा है। अब चौंकाने वाली बात ये सामने आई है कि पोस्टमार्टम के समय फांसी वाली बेल्ट भोपाल एम्स हॉस्पिटल नहीं भेजी गई थी।

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ट्विशा शर्मा की मौत का मामला | Image: Republic

Twisha Sharma Death Case: भोपाल में रिटायर्ड जज की बहू और कंटेंट क्रिएटर- पूर्व मिस पुणे ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत सवालों के घेरे में है। शादी के महज 5 महीने बाद ट्विशा 12 मई को फांसी के फंदे से लटकी पाई गई। परिवारवालों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ये आत्महत्या नहीं, हत्या का मामला है। वहीं, पूरे मामले में भोपाल पुलिस की भी गंभीर लापरवाही सामने आई है।

बाद में भेजी गई थी बेल्ट

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग से ट्विशा की मौत की पुष्टि हुई है। अब चौंकाने वाली बात ये सामने आई है कि पोस्टमार्टम के समय फांसी वाली बेल्ट भोपाल एम्स हॉस्पिटल नहीं भेजी गई। बाद में इस बेल्ट को भेजा गया था। पोस्टमार्टम के दौरान बेल्ट नहीं होने की वजह से डॉक्टर फांसी के साधन और गर्दन पर बने निशान का मिलान नहीं कर पाए। ऐसे में लिगेचर मार्क का वैज्ञानिक मिलान और उसका माप भी नहीं हो सका।

भोपाल पुलिस ने अपनी इस गलती को स्वीकार भी किया है। एसीपी रजनीश कश्यप ने माना है कि आईओ ने बेल्ट शव के साथ सबमिट नहीं किया था। इसे लेकर लापरवाही बरती गई। उन्होंने आईओ पर कार्रवाई करने की भी बात कही।

क्या है लिगेचर मटेरियल?

फॉरेंसिक साइंस और कानून के नियमों के अनुसार कोई संदिग्ध फांसी के मामले में पुलिस को शव के साथ 'लिगेचर मटेरियल' (यानी वो फंदा, रस्सी या फिर पट्टा जिससे फांसी लगाई गई हो) उसे भी अस्पताल को सौंपना होता है। इससे डॉक्टर उसके साइज, चौड़ाई और टेक्सचर का मृतक के गले पर बने फांसी के निशान से मिलान करते हैं। तब यह पता चल पाता है कि मौत उसी फंदे से हुई है या मौत का कारण कुछ और है। मृतक का गला दबाकर हत्या करने के बाद शव को फंदे पर लटकाया गया हो।

भोपाल पुलिस ने ट्विशा के पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों को यह 'लिगेचर मटेरियल' नहीं दिया। ऐसे में उसके बिना ही पोस्टमार्टम किया गया।

नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की 5 महीने पहले भोपाल के वकील समर्थ सिंह से लव मैरिज शादी की थी। दोनों डेटिंग ऐप के जरिए मिले थे। दिसंबर 2025 में ट्विशा और समर्थ की शादी हुई और महज 5 महीने बाद ट्विशा की संदिग्ध मौत हो गई। ट्विशा के सास गिरीबाला सिंह (रिटायर्ड जस्टिस) को मामले में पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जिस पर परिवार लगातार सवाल उठा रहा है।

सीएम आवास पहुंचे ट्विशा के परिवारवाले

रविवार (17 मई) को ट्विशा के परिवारवाले भोपाल में सीएम मोहन यादव के आवास पहुंचे। सीएम हाउस के सामने खड़े होकर मुख्यमंत्री से मिलने की गुहार लगाई और काफी देर तक वहीं डटे रहे। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वे माने नहीं। काफी बहस के बाद पुलिस ने परिजन से अंदर जाकर अधिकारियों से चर्चा करने की बात कही, लेकिन सीएम से सीधे मुलाकात की मांग पर अड़ा रहा।

लड़की के परिवारवालों ने आरोप लगाए कि समर्थ के परिवार ने उनकी बेटी को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ित किया है। ट्विशा का भाई भारतीय सेवा में मेजर है। ट्विशा की फैमिली की मांग की है कि उनकी जमानत को रद्द किया जाए। दोबारा दिल्ली एम्स में पोस्टमार्टम किया जाए। मौत के 6 दिन भी परिवारवालों ने अब तक ट्विशा की डेड बॉडी मोर्चरी से नहीं ली है।

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 18 May 2026 at 13:42 IST