अपडेटेड 15 February 2026 at 07:14 IST

Mahashivratri 2026: काशी से उज्जैन तक भक्ति का सैलाब... महाशिवरात्रि पर देशभर के मंदिरों में सुबह से ही धूम, लाखों भक्त उमड़े

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के अवसर पर सुबह से ही देशभर के विभिन्न मंदिरों में भक्तों का तांता लगा है। तमाम श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में लीन नजर आ रहे हैं। चारों ओर 'हर हर महादेव' और 'बम भोले' के जयकारे गूंज रहे हैं।

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Mahashivratri 2026 | Image: X- ANI

Mahashivratri 2026: आज, 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। यह त्योहार भगवान शिव की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है, जब भक्त उपवास और पूजा-अर्चना में लीन रहते हैं। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। चारों ओर 'हर हर महादेव' और 'बम भोले' के जयकारे गूंज रहे हैं।

महाकाल मंदिर पहुंच रही भक्तों की भीड़

उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और महाभिषेक का आयोजन किया गया। यहां सुबह से ही लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र चढ़ाते नजर आ रहे हैं। मंदिर प्रशासन ने भक्तों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था, जल व्यवस्था और दर्शन के लिए अलग-अलग मार्ग शामिल हैं।

उज्जैन के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट रोशन कुमार सिंह ने बताया, "मंदिर में पूजा करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त आ रहे हैं। भक्तों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए सही इंतजाम किए गए हैं।" महाकाल मंदिर में मंदिर के कपाट लंबे समय तक खुले रखे गए हैं, जिससे भक्तों को पर्याप्त समय मिल रहा है।

जगह-जगह दिखा ऐसा ही नजारा

काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर सोमनाथ, ओंकारेश्वर और अन्य प्रमुख ज्योतिर्लिंगों तक हर जगह यही नजारा है। महाशिवरात्रि के पर्व पर काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त वाराणसी पहुंच रहे हैं।

वहीं, दिल्ली से लेकर यूपी, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के विभिन्न मंदिरों में भी भक्तों की भीड़ देखी जा रही है। भक्त सुबह से ही मंदिरों में पहुंचकर भोलेनाथ की भक्ति में डूबे हुए हैं।

महाशिवरात्रि का पौराणिक महत्व क्या है?

मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। कठोर तपस्या के बाद माता पार्वती ने शिव को पति रूप में प्राप्त किया और शिव ने गृहस्थ जीवन स्वीकार कर लोक कल्याण का मार्ग अपनाया। इसलिए महाशिवरात्रि को दांपत्य सुख, प्रेम, समर्पण और पारिवारिक स्थिरता का पर्व भी माना जाता है। इसके अलावा, यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव का प्राकट्य हुआ था। इस दिन की गई पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है।

महाशिवरात्रि 2026 पूजा विधि 

  • सबसे पहले सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। 
  • शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक करें। 
  • इसके बाद केसर मिला जल अर्पित करें। 
  • बेलपत्र, भांग, धतूरा, फल और मिठाई चढ़ाएं। 
  • चंदन का तिलक करें और दीपक जलाएं।
  • पूरी रात दीप जलाकर रात्रि जागरण करें। 
  • शिव पुराण का पाठ और रुद्राभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 15 February 2026 at 07:13 IST