अपडेटेड 14 February 2026 at 16:27 IST
Mahashivratri 2026 Bel Patra: शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय न करें ये गलतियां, वरना अधूरा रह जाएगा फल; जानें बिल्वपत्र चढ़ाने के सही तरीका
Shivling Par Bel Patra Chadane Ka Sahi Tarika: महाशिवरात्रि 2026 पर सही विधि और सच्ची श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर की गई पूजा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
- धर्म और अध्यात्म
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Mahashivratri 2026 Bel Patra Ke Niyam: पंचांग के अनुसार हर साल महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना और व्रत का विधान है। शिवपुराण में बताया गया है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को जल अर्पित करने मात्र से ही वे अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि तथा सुखी जीवन का आशीर्वाद देते हैं।
इस पावन दिन पर भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, भस्म, धतूरा और बेलपत्र अर्पित करते हैं। इन सभी चीजों का अपना-अपना महत्व है, लेकिन बेलपत्र को विशेष रूप से प्रिय माना गया है। कहा जाता है कि जल के साथ केवल बेलपत्र चढ़ाने से भी भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। हालांकि, अगर बेलपत्र चढ़ाने में कुछ गलतियां हो जाएं, तो पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता। इसलिए महाशिवरात्रि 2026 पर बेलपत्र चढ़ाने के सही नियम जानना बेहद जरूरी है।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के नियम
इन दिनों बेलपत्र न तोड़ें
शिवपुराण के अनुसार सोमवार और चतुर्दशी तिथि के दिन बेलपत्र तोड़ना वर्जित माना गया है। इसलिए इन दिनों से एक दिन पहले ही बेलपत्र तोड़ लेना चाहिए। मान्यता है कि बेलपत्र कभी बासी नहीं होता, इसलिए पहले से तोड़ा गया बेलपत्र भी पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है।
बेलपत्र तोड़ने की सही तरीका
बेलपत्र तोड़ते समय केवल तीन पत्तियों वाला बिल्वपत्र ही तोड़ें। पूरी टहनी या डाल तोड़ना अशुभ माना जाता है और इससे दोष लग सकता है। शास्त्रों के अनुसार केवल पत्तियों को अलग करना ही सही तरीका है।
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कैसा होना चाहिए बेलपत्र?
पूजा के लिए ऐसा बेलपत्र चुनें जिसमें तीनों पत्तियां आपस में जुड़ी हों और मिलकर एक पूर्ण पत्ती का रूप बनाती हों। इसे ही पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
ऐसा बेलपत्र न चढ़ाएं
भगवान शिव को कभी भी गंदा, दाग-धब्बों वाला, कटा-फटा या टूटा हुआ बेलपत्र अर्पित नहीं करना चाहिए। पूजा में हमेशा साफ, हरा और साबुत बेलपत्र ही प्रयोग करें।
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कितने बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है?
शिवपुराण के अनुसार शिवलिंग पर 3, 5, 11, 21, 51 या 101 बेलपत्र चढ़ाना विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना जाता है।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की सही विधि
सबसे पहले बेलपत्र को साफ जल से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद चंदन या केसर में गंगाजल मिलाकर एक लेप तैयार करें और लकड़ी की सहायता से बेलपत्र की तीनों पत्तियों पर ‘ॐ’ लिखें। अगर चाहें तो बिना लिखे भी बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं। ध्यान रखें कि बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग की ओर रहे। बेलपत्र चढ़ाते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें, इससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
यदि बेलपत्र उपलब्ध न हो तो क्या करें?
अगर किसी कारण से आपको बेलपत्र न मिल पाए, तो शिव मंदिर में पहले से चढ़ा हुआ बेलपत्र भी दोबारा उपयोग में लिया जा सकता है। इसके लिए शिवलिंग से बेलपत्र उठाकर उसे गंगाजल या साफ पानी से धो लें और फिर श्रद्धा के साथ पुनः अर्पित करें। ऐसा करने से भी पुण्य और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
महाशिवरात्रि 2026 पर सही विधि और सच्ची श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर की गई पूजा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 14 February 2026 at 16:27 IST