अपडेटेड 2 January 2026 at 13:57 IST
Indore Water Contamination: अफसरों की लाल फीताशाही में चली गई इंदौर में 13 निर्दोषों की जान, निगम पार्षद ने अधिकारियों पर फोड़ा ठीकरा
नर्मदा की जिस पाइपलाइन में ड्रेनेज का पानी मिल रहा था, उस पाइपलाइन को महीनों पहले ही बदल जाना था। मगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी टेंडर दबाकर बैठे हुए थे। जांच में निगम अधिकारी की लापरवाही की बात सामने आ रही है।
मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के संकट को लेकर मचे हंगामे के बीच नगर निगम अधिकारियों की बड़ी लापरवाही की बात सामने आ रही है। जांच में यह बात सामने आई है कि जिस पाइपलाइन में ड्रेनेज का पानी मिल रहा था, उस पाइपलाइन को महीनों पहले ही बदल जाना था, मगर नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से इस काम को महीनों टाला दिया गया। टेंडर में भी हेर फेर की बाद सामने आ रही है।
नर्मदा की पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवेज का गंदा पानी मिल गया। दूषित पानी पीने से अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है तो सैकड़ों लोग बीमार हैं। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पानी की सैंपल जांच बैक्टीरिया होने के बाद सामने आई। अब नगर निगम अधिकारियों की भी बड़ी लापरवाही उजागर हुआ है।
महीनों पहले बदला जाना था सप्लाई पाइपलाइन
नर्मदा की जिस पाइपलाइन में ड्रेनेज का पानी मिल रहा था, उस पाइपलाइन को महीनों पहले ही बदल जाना था। मगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी टेंडर दबाकर बैठे हुए थे। 8 अगस्त को भागीरथपुरा इलाके की नर्मदा पाइपलाइन बदलने का टेंडर हुआ था
टेंडर खरीदने की आखिरी तारीख 15 सितंबर शाम 6 बजे तक था, जबकि टेंडर 17 सितंबर को दोपहर 12 बजे खोला जाना था, लेकिन टेंडर को 100 से ज्यादा दिन बाद 29 दिसंबर को शाम साढ़े 4 बजे खोला गया।
2.40 करोड़ रुपए के टेंडर में हेराफेरी
निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव और अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया ने इतने दिनों तक टेंडर दबाए रखा। 2.40 करोड़ रुपए का टेंडर था, 7 कंपनियों ने इस टेंडर को भरा था, 1 कंपनी का टेंडर रिजेक्ट हुआ था। सभी कंपनियां 15 सितंबर तक टेंडर भी भर चुकी थी। समय पर टेंडर खुलने पर अब तक भागीरथपुरा इलाके की पाइपलाइन बदली जा चुकी होती और शायद ना लोगों की मौत होती और ना ही इतने लोग बीमार होते। एक लापरवाही की वजह से इतने लोगों की जान चली गई।
वार्ड पार्षद ने भी लिखी सीएम को चिट्ठी
इसका शिकायत इलाके के वॉर्ड 11 के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को चिट्ठी लिखकर भी की है। जिसमें उन्होंने लिखा है- नर्मदा की नई पाइपलाइन की फाइल 12 नवंबर 2024 को तैयार कर ली गई थी। अफसरों ने 7 महीने तक फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया। दबाव डालने पर 30 जुलाई 2025 को टेंडर जारी किया गया, लेकिन टेंडर के काम को समय सीमा में पूरा नहीं किया गया।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 2 January 2026 at 13:57 IST