Indore: सिस्टम ने ली 15 जान? 3 साल से गंदा पानी पी रहे लोग! 1 से 31 दिसंबर के बीच हुई 400 से अधिक शिकायतें
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पेयजल पाइपलाइन में सीवेज मिलने से दूषित पानी की आपूर्ति हुई, जिससे 15 लोगों की जान चली गई। यह समस्या अचानक नहीं आई। इलाके में पुरानी और जर्जर पाइपलाइनें से सालों से दूषित पानी की शिकायतें मिल रही थीं। स्थानीय लोग महीनों से बदबूदार और गंदा पानी आने की शिकायत कर रहे थे।
मध्य प्रदेश का इंदौर शहर, जो लगातार आठ साल से देश का सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीतता आ रहा है, इन दिनों एक गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में नगर निगम की पेयजल पाइपलाइन में सीवेज का पानी मिलने से बड़ा स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया। दूषित पानी पीने से उल्टी-दस्त और डायरिया का प्रकोप फैला और लापरवाही की भेंट दर्जनों जानें चढ़ गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार मौतों की संख्या 15 तक पहुंच गई है, हालांकि सरकारी आंकड़ों में मौत का आंकड़ा कम बताया जा रहा है। सैकड़ों लोग बीमार होकर अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है। इसमें स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आई है। यह समस्या अचानक नहीं आई। इलाके की पुरानी और जर्जर पाइपलाइनें सालों से दूषित पानी की शिकायतें लगातार आ रही थीं। स्थानीय लोग महीनों से बदबूदार और गंदा पानी आने की शिकायत कर रहे थे।
3 साल से पी रहे गंदा पानी?
2022 में तत्कालीन नगर निगम आयुक्त प्रतिभा पाल ने भागीरथपुरा में पाइपलाइन बदलने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। जनवरी 2023 में बजट पास हो गया, लेकिन काम नहीं हुआ। अगस्त 2025 में 2.4 करोड़ रुपये का टेंडर जारी हुआ, लेकिन अफसरों की लापरवाही से यह महीनों तक लंबित रहा। मौतें शुरू होने के बाद ही काम की शुरुआत हुई। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने छह महीने पहले ही पाइपलाइन बदलने के निर्देश दिए थे, लेकिन अफसरों ने ध्यान नहीं दिया।
कैसे हुआ हादसा?
जांच में पता चला है कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास बने शौचालय के ठीक नीचे नर्मदा जल आपूर्ति की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज था। शौचालय का गंदा पानी सीधे पेयजल लाइन में मिल रहा था। लैब टेस्ट में पानी के सैंपल्स में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और मानव मल से जुड़े खतरनाक जीवाणु मिले हैं। शहर के 50 पानी के नमूनों में से 26 फेल हो गए, जो मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
शिकायतों का अंबार, फिर भी अनदेखी
मेयर हेल्पलाइन 311 पर दिसंबर 2025 में शहर भर से दूषित पानी की 400 से ज्यादा शिकायतें आईं। अकेले भागीरथपुरा वाले जोन में सैकड़ों शिकायतें लंबित थीं। स्थानीय पार्षद और निवासियों ने बार-बार चेतावनी दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी नगर निगम को तीन पत्र लिखकर शहर के 59 मोहल्लों में पानी दूषित होने की चेतावनी दी थी।
नगर निगम अब टैंकरों से शुद्ध पानी सप्लाई कर रहा है। घर-घर सर्वे, क्लोरीनेशन और मुफ्त दवाएं बांटी जा रही हैं। लेकिन लोगों का भरोसा टूट चुका है। यह घटना इंदौर जैसे स्वच्छ शहर के लिए सबक है कि बाहरी चमक के पीछे बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी कितनी भयावह हो सकती है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 3 January 2026 at 13:45 IST