Twisha Death Case: गिरिबाला सिंह पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, देर रात जमानत रद्द होने के बाद सुबह आवारा कुत्तों खाना खिलाती आईं नजर-VIDEO
ट्विशा शर्मा मौत मामले में अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह पर अब गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। इस बीच आज गिरिबाला घर के बाहर आवारो कुत्तों को खाना खिलाती नजर आईं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा मौत प्रकरण में देर रात बड़ा फैसला सुनाते हुए उनकी सास और सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, व्हाट्सएप चैट, गवाहों के बयान और केस डायरी जैसे महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। गिरबाला पर जांच में सहयोग नहीं करने का भी आरोप लगा है, ऐसे में उनकी अग्रिम जमानत याचिका रद्द कर दी गई है। अब उनके ऊपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने बुधवार देर रात भोपाल की ट्रायल कोर्ट द्वारा 15 मई को दिए गए अग्रिम जमानत आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में गंभीर आरोप हैं, आरोपित जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं और उपलब्ध साक्ष्यों को नजरअंदाज किया गया था। अग्रिम जमानत रद्द होने के साथ ही गिरिबाला सिंह पर अब गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। CBI पूछताछ के लिए उन्हें रिमांड पर ले सकती है।
गिरिबाला सिंह कुत्तों को खिलाती आईं नजर
इस फैसले के कुछ घंटों बाद ही गिरिबाला सिंह का एक वीडियो गुरुवार सुबह सामने आया है। वीडियो में वह अपने घर के बाहर आवारा कुत्ते को खाना खिलाती नजर आ रही हैं। वह एक बर्तन में खाना रखकर कुत्ते की ओर देखती हैं, फिर मीडिया की ओर मुड़कर देखती हुई घर के अंदर चली जाती हैं।
जमानत रद्द होने के बाद लटकी गिरफ्तारी की तलवार
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मृतका के शरीर पर कई एंटीमॉर्टम चोटें थीं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार के वकील ने बताया कि पोस्टमॉर्टम के नतीजों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि ये चोटें ट्विशा की मौत से पहले हुई किसी हाथापाई के थे। इन चोटों के मौत के बाद फंदे से शव उतारते समय लगने के अनुमान को भी रिपोर्ट में खारिज कर दिया गया। CBI की एक टीम मध्य प्रदेश के भोपाल में,ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह के आवास पर पहुंची।
क्राइम सीन मैनेजमेंट का गिरिबाला ने किया है क्रोर्स
गिरिबाला सिंह के खिलाफ अदालत की टिप्पणी में यह भी सामने आया कि उन्होंने साइबर क्राइम, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल सिग्नेचर टेक्नोलॉजी और क्राइम सीन मैनेजमेंट जैसे विशेष कोर्स किए हैं। कोर्ट ने माना कि ऐसे तकनीकी ज्ञान के कारण साक्ष्यों से छेड़छाड़ या उन्हें प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता
जांच के दौरान एक और बड़ा सवाल सीसीटीवी फुटेज को लेकर उठा। पुलिस ने फुटेज जब्त कर लिए थे, इसके बावजूद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए कहा कि यह जांच की गोपनीयता और साक्ष्यों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 28 May 2026 at 11:10 IST