हाथों में अंडे और 'चोर-चोर' के नारे... कोर्ट में वकीलों और फुटबॉल प्रेमियों का फूटा गुस्सा, TMC नेता अरूप विश्वास बाल-बाल बचे- VIDEO

Kolkata News: वकील और फुटबॉल प्रेमी खुलकर नारेबाजी कर रहे थे। कुछ लोगों ने अरूप पर अंडे फेंकने की कोशिश की, जबकि कई अन्य डंडों के साथ आक्रामक हो रहे थे।

 
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अरूप विश्वास के कोर्ट में पहुंचने पर हंगामा | Image: X

TMC Leader Arup Biswas news: गुरुवार (18 जून) को कोलकाता के अलीपुर कोर्ट परिसर में उस वक्त तनाव का माहौल बन गया, जब तृणमूल कांग्रेस के पूर्व मंत्री अरूप विश्वास कोर्ट पहुंचे। मेसी इवेंट विवाद के बीच उनकी मौजूदगी की खबर फैलते ही वकीलों और फुटबॉल प्रेमियों की भीड़ जमा हो गई। बताया जा रहा है कि भीड़ में कई लोगों के हाथों में डंडे और अंडे थे। वह लगातार “चोर-चोर” के नारे लगा रहे थे।

क्यों कोर्ट में मचा बवाल?

मेसी के कोलकाता दौरे (GOAT India Tour) के दौरान हुए कुप्रबंधन, टिकट घोटाले और प्रोटोकॉल भंग के आरोपों में अरूप विश्वास पर लगातार कार्रवाई हो रही है। बिधाननगर साउथ थाने में पूछताछ के बाद अरूप विश्वास वकील के चैंबर में गए थे। जैसे ही उनकी उपस्थिति की सूचना फैली, कोर्ट परिसर में भारी भीड़ जुट गई।

June 18, 2026

वकील और फुटबॉल प्रेमी खुलकर नारेबाजी कर रहे थे। कुछ लोगों ने अरूप पर अंडे फेंकने की कोशिश की, जबकि कई अन्य डंडों के साथ आक्रामक हो रहे थे। स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। इस बीच अरूप विश्वास को किसी तरह सुरक्षा घेरे में लेकर बाहर निकाला गया।

घटना के बाद अलीपुर कोर्ट परिसर में भारी सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

अरूप विश्वास पर लगे आरोप

पिछले साल दिसंबर में सॉल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित मेसी के कार्यक्रम को लेकर भारी विवाद हुआ था। खराब प्रबंधन, बिना अनुमति वाले लोगों का मैदान में घुसना, मेसी के साथ अनावश्यक संपर्क और टिकटों में कथित अनियमितताओं के आरोप अरूप विश्वास पर लगे।

मेसी का बंगाल पुलिस को लेटर

अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनल मेसी ने पश्चिम बंगाल पुलिस को भेजे गए एक ईमेल में कोलकाता इवेंट के दौरान हुई अव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था की लापरवाही के लिए तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इवेंट प्रमोटर सतद्रु दत्ता को पूरी तरह क्लीन चिट दे दी है।

17 जून को मेसी के ऑफिस की तरफ से भेजे गए इस ईमेल में साफ कहा गया कि इवेंट को समय से पहले खत्म करने का फैसला प्रमोटर के हाथ में नहीं था, इसलिए उन्हें किसी भी तरह का दोष नहीं दिया जा सकता। पत्र में जिक्र किया गया कि सुरक्षा को खतरे में देखते हुए और तय प्रोटोकॉल के उल्लंघन की वजह से यह फैसला लेना जरूरी हो गया था।

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 18 June 2026 at 21:13 IST