अपडेटेड 11 March 2026 at 12:42 IST
'देश में सभी धर्मों के लोग...', कोच गौतम गंभीर के बयान पर कीर्ति आजाद का पलटवार, कहा- हम लोकतांत्रिक देश में रहते हैं
टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर के बयान पर TMC सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद का पलटवार आया है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को अपनी स्थिति को डिग्रेड नहीं करना चाहिए।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और टीएमसी (TMC) के मौजूदा सांसद कीर्ति आजाद ने एक बार फिर टी-20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जीतने के बाद ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर सवाल उठाया है। इस बार उन्होंने गौतम गंभीर के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि हमें नहीं भूलना चाहिए कि भारत एक लोकतांत्रित देश है और यहां हर धर्म का सम्मान है।
टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार, हेड कोच गौतम गंभीर और आईसीसी के अध्यक्ष जय शाह ट्रॉफी लेकर अहमदाबाद में एक हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए गए थे। तीनों ट्रॉफी के साथ भगवान हनुमान जी के दर्शन किए थे। इस पर कीर्ति आजाद ने एक विवादित पोस्ट के जरिए सवाल उठाया था कि ट्राफी को लेकर मंदिर ही क्यों पहुंचे? उनके इस बयान के बाद बखेड़ा शुरू हो गया।
गौतम गंभीर का कीर्ति आजाद पर तंज
न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में जब गौतम गंभीर से कीर्ति आजाद के मंदिर वाले बयान पर सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब में कहा, मुझे लगता है कि इस सवाल का जवाब देना भी बेकार है। आप ऐसा बयान देते हैं, तो आप सचमुच अपने खिलाड़ियों और अपनी ही टीम का अपमान कर रहे हैं, जो नहीं होना चाहिए।
कीर्ति आजाद का गौतम गंभीर को पलटवार
अब टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर के बयान पर TMC सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद का पलटवार ने कहा, "हां, बिल्कुल खिलाड़ियों को डिग्रेड नहीं करना चाहिए। खिलाड़ियों को भी अपनी स्थिति को डिग्रेड नहीं करना चाहिए। हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है जिसमें सभी धर्मों के लोग रहते हैं और सभी का सम्मान किया जाना चाहिए।"
TMC सांसद को किस बात से है आपत्ति
बता दें कि इससे पहले कीर्ति आजाद ने एक्स पर लिखा था 'टीम इंडिया पर शर्म आती है! जब हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में विश्व कप जीता था, तब हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई खिलाड़ी थे। हम ट्रॉफी को अपनी धार्मिक जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि भारत (हिंदुस्तान) में लाए थे। आखिर भारतीय क्रिकेट ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं?।'
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 11 March 2026 at 12:42 IST