अपडेटेड 26 September 2025 at 22:27 IST
जोधपुर स्वामिनारायण मंदिर प्रतिष्ठा महोत्सव: महंत स्वामी महाराज ने मंदिर निर्माण में सहयोग देनेवालों का किया पूजन और शाही सम्मान
Jodhpur Swaminarayan Temple Pratistha Mahotsav: यह संस्था का पहला मंदिर है जिसका निर्माण जोधपुरी छित्तर पत्थरों से हुआ है। मंदिर का निर्माण कार्य 2018 में शुरू हुआ था। 42 बीघा की जमीन पर बने इस मंदिर में पांच भव्य शिखर, 281 भव्य कलात्मक स्तंभ, 151 संतों, भक्तों, पार्षदों, अवतारों की शिल्प प्रतिमाएं हैं।
Jodhpur Swaminarayan Temple Pratistha Mahotsav: अमेरिका के अक्षरधाम मंदिर और अबू धाबी के बीएपीएस हिंदू मंदिर के निर्माता महंत स्वामीजी महाराज ने 25 सितंबर को बीएपीएस के जोधपुर स्वामिनारायण मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न कराया। इस खास मौके पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अश्विनी वैष्णव समेत तमाम साधु-संत और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
19 सितंबर से 28 सितंबर तक चलने वाले इस मंदिर महोत्सव कार्यक्रम में राजस्थान और भारत के अलग-अलग राज्यों से आए हुए लोगों के साथ-साथ अमेरिका, यूरोप, अफ्रिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे महाद्वीपों से भी लोग बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं।
इस बीच आज 26 सितंबर को महंत स्वामी महाराज ने मंदिर निर्माण में सहयोग देनेवाले सभी शिल्पियों का पूजन और शाही सम्मान किया। इसके साथ ही कालीबेरी सूरसागर स्थित नवनिर्मित भव्य स्वामिनारायण मंदिर का प्रतिष्ठा महोत्सव जोधपुर के इतिहास में एक अविस्मरणीय अवसर बन गया।

मंदिर निर्माण में सहयोग देनेवाले प्रत्येक शिल्पी का स्वामी महाराज ने किया सम्मान
आज जोधपुर स्वामिनारायण मंदिर प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान महंत स्वामी महाराज ने मंदिर निर्माण में सहयोग देनेवाले सभी शिल्पियों का पूजन और शाही सम्मान किया। कालीबेरी सूरसागर स्थित नवनिर्मित भव्य स्वामिनारायण मंदिर का प्रतिष्ठा महोत्सव जोधपुर के इतिहास में एक अविस्मरणीय अवसर बन गया। इस अवसर पर गुरु महंत स्वामी महाराज ने अपनी पावन इच्छा व्यक्त की कि मंदिर निर्माण में सहयोग देनेवाले प्रत्येक शिल्पी का वे स्वयं पूजन और सम्मान करेंगे।
आज दोपहर 12.30 बजे विशेष रूप से आयोजित शिल्पी सम्मान सभा में महंत स्वामी महाराज ने अपनी करुणामयी उपस्थिति से प्रत्येक कारीगर को आशीर्वाद और सम्मान प्रदान किया। सम्मान का भव्य स्वरूप की बात करें तो इस दौरान सभी शिल्पियों को एक-एक करके मंच पर आमंत्रित किया गया। उसके बाद सर्वप्रथम माला अर्पण कर बहुमान किया गया। उसके बाद साफा-पगड़ी बांधकर तिलक व पूजन किया गया। सद्गुरु संतों ने वस्त्र ओढ़ाकर और प्रसाद भेंट कर सभी का मुंह मीठा कराया। यह दृश्य एक राजसी दरबार की भव्यता और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम बन गया।
इस सम्मान के अभिभूत होकर शिल्पियों ने अपनी-अपनी की भावनाएं वक्त की। कारीगर उदयसिंह ने कहा, “यह मेरे जीवन का सबसे अविस्मरणीय क्षण है। ऐसा सम्मान हमें कौन दे सकता है? आज हम कृतार्थ हो गए हैं।”
आपने मंदिर निर्माण में योगदान देकर स्वयं को महान भक्त बना लिया - स्वामी महाराज
इस खास मौके पर महंत स्वामी महाराज ने आशीर्वाद स्वरूप कहा, “आप छोटे नहीं हैं। मंदिर में किया गया प्रत्येक श्रम पावन है। आपने मंदिर निर्माण में योगदान देकर स्वयं को महान भक्त बना लिया है। आप सभी अक्षरमुक्त और एकांतिक भक्त बनेंगे। यदि हम आपको दंडवत प्रणाम करें तो भी कम है।” वहीं, सभा के अंत में महंत स्वामी महाराज ने सभी शिल्पियों के साथ सामूहिक फोटो खिंचवाया। यह क्षण उन सभी के लिए एक जीवन भर का गौरव और आध्यात्मिक उपलब्धि बन गया।

जोधपुरी छित्तर पत्थरों से हुआ है मंदिर का निर्माण
गौरतलब है कि यह संस्था का पहला मंदिर है जिसका निर्माण जोधपुरी छित्तर पत्थरों से हुआ है। मंदिर का निर्माण कार्य 2018 में शुरू हुआ था। 42 बीघा की जमीन पर बने इस मंदिर में पांच भव्य शिखर, 281 भव्य कलात्मक स्तंभ, 151 संतों, भक्तों, पार्षदों, अवतारों की शिल्प प्रतिमाएं हैं।
साथ ही भगवान स्वामिनारायण के योगी स्वरूप निलकंठवर्णी को समर्पित 11,551 वर्ग फीट का निलकंठवर्णी अभिषेक मंडपम भी है। इस मंदिर का निर्माण जोधपुर, जयपुर, पिंडवाड़ा, सगवाड़ा, भरतपुर के 500 से भी अधिक कारीगरों ने मिलकर किया है।
Published By : Amit Dubey
पब्लिश्ड 26 September 2025 at 22:27 IST