असम के जोरहाट एयरबेस पर वायुसेना का विमान AN-32 क्रैश, 5 जवान शहीद; दोनों पायलटों को बचाया गया
असम के जोरहाट स्थित वायुसेना स्टेशन पर शनिवार सुबह लैंडिंग के दौरान एक सैन्य विमान क्रैश हो गया। यह AN-31 मालवाहक विमान था, जिसका इस्तेमाल रसद और सामान की ढुलाई के लिए किया जाता है।
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असम के जोरहाट स्थित वायुसेना स्टेशन पर शनिवार सुबह लैंडिंग के दौरान एक सैन्य विमान क्रैश हो गया। यह AN-31 मालवाहक विमान था, जिसका इस्तेमाल रसद और सामान की ढुलाई के लिए किया जाता है। हादसा उस वक्त हुआ जब विमान लैंड कर रहा था और अचानक धमाके के बाद उसमें आग लग गई। जानकारी के मुताबिक विमान में दो पायलटों सहित कुल 7 जवान सवार थे।
दोनों पायलटों को बचा लिया गया जबकि 5 जवान शहीद हो गए हैं। भारतीय वायुसेना (IAF) ने इस दुर्घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि मौके पर स्थिति का बारीकी से आकलन किया जा रहा है और जैसे ही नए तथ्य सामने आएंगे, आगे की जानकारी प्रदान की जाएगी। वायुसेना ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए आधिकारिक जांच शुरू कर दी है।
हादसे में वायु सेना के 5 जवान शहीद
ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत, अग्निवीरवायु दानिश आलम शामिल हैं। भारतीय वायु सेना ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और कहा कि इस दुख की घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।
AN-32 मालवाहक विमान पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में भी उतरने में सक्षम
भारतीय वायु सेना के पास लगभग 100 एंटोनोव AN-32 टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट विमानों का बेड़ा है। हालांकि IAF ने शुरू में सोवियत मूल के ऐसे 125 प्लेन खरीदे थे, लेकिन अब एक्टिव-ड्यूटी प्लेन की संख्या लगभग 100 रह गई है। AN-32 ने 1980 से IAF की मीडियम-लिफ्ट ट्रांसपोर्ट क्षमताओं की रीढ़ के तौर पर काम किया है। गर्म मौसम और हिमालय जैसे ऊंचे इलाकों में ऑपरेशन के दौरान इसकी मजबूती के कारण इसे काफी अहम माना जाता है।
AN-32 अब तक 22 दुर्घटनाओं का शिकार
वर्ष 1986 से अब तक AN-32 विमान भारत में लगभग 22 दुर्घटनाओं का शिकार हो चुका है। इसकी सबसे हालिया दुर्घटना वर्ष 2025 में दर्ज की गई थी। दुर्घटनाओं के इतिहास के बावजूद AN-32 भारतीय वायु सेना के सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले परिवहन विमानों में शामिल है और देशभर में लॉजिस्टिक सपोर्ट, सैनिकों की आवाजाही तथा विभिन्न ऑपरेशनल मिशनों में आज भी इसकी अहम भूमिका बनी हुई है।
इसी साल मार्च में भारतीय वायु सेना का एक सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) लड़ाकू विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस दुर्घटना में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर की मौत हो गई थी। विमान ने जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरी थी। यह हादसा असम के कार्बी आंगलोंग जिले के बोकाजन सब-डिवीजन स्थित इंगलोंग एकोपी पहाड़ी क्षेत्र में हुआ था, जो जोरहाट एयरबेस से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 13 June 2026 at 14:46 IST