इकोनॉमी और शेयर बाजार के आने वाले हैं अच्छे दिन! मिडिल ईस्ट संकट खत्म, आखिरी स्टेज में है भारत-अमेरिका ट्रेड डील लेकिन यहां फंसा है पेंच

23-24 जून को नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई दो दिन की बैठक के बाद भारत और अमेरिका ने व्यापार बातचीत में काफी प्रगति की है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समझौते के रास्ते में अभी भी कुछ अहम मतभेद बने हुए हैं।

 
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PM Modi with Trump | Image: PIB

23-24 जून को नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई दो दिन की बैठक के बाद भारत और अमेरिका ने व्यापार बातचीत में काफी प्रगति की है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समझौते के रास्ते में अभी भी कुछ अहम मतभेद बने हुए हैं।

ASPI (सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट) की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट वेंडी कटलर ने कहा, "हाल की बैठकों में काफी प्रगति के बावजूद, भारत के साथ व्यापार समझौता करना मुश्किल साबित हो रहा है।"

कहां फंस रहा पेंच?

उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं और 'रेड लाइन्स' (सीमाएं) हैं जो सफल नतीजे तक पहुंचने में बाधा डाल रही हैं। इसके अलावा, पिछले एक साल की घटनाओं ने दिल्ली के मन में भरोसे की कमी पैदा की है, जिससे बातचीत को अंतिम रूप देना और भी मुश्किल हो गया है।"

कटलर के अनुसार, भारत किसी भी समझौते को अंतिम रूप देने से पहले टैरिफ व्यवस्था पर अधिक स्पष्टता चाहता है। उन्होंने कहा, "भारत अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में टैरिफ में तरजीही बढ़त चाहता है, इसलिए वह टैरिफ दरों और उत्पादों को बाहर रखने के बारे में और स्पष्टता मिलने तक समझौता करने की जल्दी में नहीं है। साथ ही, वह वाशिंगटन से इस बात का भरोसा चाहता है कि टैरिफ में और बढ़ोतरी नहीं की जाएगी, जो संभवतः ट्रंप टीम के लिए बहुत बड़ी मांग है।"

एंथ्रोपिक के फेबल मॉडल को लॉन्च करने पर भी बातचीत

अमेरिका और भारत, एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल - जिनमें एंथ्रोपिक (Anthropic) द्वारा विकसित मॉडल भी शामिल हैं - को जारी करने के बारे में हाई-लेवल और "संवेदनशील" बातचीत कर रहे हैं।

अमेरिका के आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग ने इस बातचीत की पुष्टि की और जोर दिया कि दोनों देश फ्रंटियर AI टेक्नोलॉजी के लिए एक सुरक्षित और सहयोगी नजरिए को प्राथमिकता दे रहे हैं।

ANI के साथ एंथ्रोपिक के 'फेबल' (Fable) जैसे मॉडल को लॉन्च करने के बारे में हुई एक खास बातचीत में, हेलबर्ग ने जोर दिया कि अमेरिका एक "धीरे-धीरे और सोच-समझकर उठाए जाने वाले कदम" (gradual, measured approach) के लिए प्रतिबद्ध है। यह रणनीति न केवल अमेरिका के लिए, बल्कि भारत और उन अन्य "भरोसेमंद साझेदारों" के लिए भी सुरक्षा सुनिश्चित करने के मकसद से बनाई गई है जो पावर ग्रिड जैसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इन टेक्नोलॉजी पर निर्भर हैं।

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Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 25 June 2026 at 23:32 IST