अपडेटेड 19 January 2026 at 07:54 IST
गाजा में शांति के प्रयास के लिए भारत को मिली बड़ी जिम्मेदारी, ट्रंप ने 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के लिए PM Modi को दिया न्योता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा के लिए बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने के लिए इनवाइट किया है।
गाजा में शांति के प्रयास तेज हो गए हैं। इस कड़ी में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित पांच देशों को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया है। यह बोर्ड गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने और शांति की पहल को आगे बढ़ाने के लिए बनाया जा रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी गाजा के लिए बोर्ड ऑफ पीस में इनवाइट किया गया है।
यह जानकारी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दी है, उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्रंप का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा एक लेटर शेयर किया है और बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को गाजा के लिए बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने के लिए इनवाइट किया है। इस बोर्ड में उन देशों का एक ग्रुप शामिल है, जिन्हें अमेरिका गाजा पट्टी के लिए एक गवर्नेंस स्ट्रक्चर देने के लिए इनवाइट कर रहा है, क्योंकि ट्रंप की शांति योजना के तहत हमास पर इस इलाके में अपनी गवर्नेंस की भूमिका छोड़ने का दबाव डाला जा रहा है।
अमेरिका ने दिया भारत को न्योता
ट्रंप की 20-सूत्रीय व्यापक शांति योजना के तहत गठित यह बोर्ड गाजा में शांति, शासन, पुनर्निर्माण, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाएगा। अमेरिकी सूत्रों के अनुसार, करीब 60 देशों को इस पहल के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें भारत के पड़ोसी मूल्क पाकिस्तान भी शामिल है।अमेरिका इस योजना के दूसरे चरण को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
गाजा पीस बोर्ड में भारत की अहम भूमिका
गाजा पीस बोर्ड में भारत की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि भारत इजरायल और फिलिस्तीन दोनों के साथ मजबूत ऐतिहासिक संबंध रखता है। संघर्ष शुरू होने के बाद से ही भारत मिस्र के रास्ते गाजा को मानवीय सहायता पहुंचा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले भी बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता बढ़ाने वाले समझौते का स्वागत किया था। उन्होंने यह भी दोहराया था कि आतंकवाद किसी भी रूप में दुनिया में कहीं भी स्वीकार्य नहीं है।
बोर्ड ऑफ में कौन-कौन से देश शामिल
बता दें कि बोर्ड ऑफ पीस में ट्रंप खुद चेयरमैन हैं और इसमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक अध्यक्ष अजय बंगा, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान और कतर के राजनयिक अली अल-थवादी भी शामिल हैं। इजरायल ने इस बोर्ड पर आपत्ति जताई है, क्योंकि इसमें तुर्की और कतर जैसे देश शामिल हैं जिन्हें वह हमास का समर्थक मानता है। फिलिस्तीनी संगठन इस्लामिक जिहाद ने भी इसे इजरायल के हितों की पूर्ति करने वाला बोर्ड बताया है।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 19 January 2026 at 07:36 IST