अपडेटेड 3 March 2025 at 16:20 IST
'फंडामेंटल राइट का मतलब ये नहीं कि कुछ भी बोलें', रणवीर इलाहाबादिया केस में सख्त दिखा SC; जानिए क्या-क्या कहा
रणवीर इलाहाबादिया को राहत देने के साथ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बोलने का फंडामेंटल राइट होने का मतलब ये नहीं कि कोई कुछ भी बोल सकता है। शो को सब लोग देखते हैं।
Ranveer Allahbadia: रणवीर इलाहाबादिया को सुप्रीम कोर्ट ने शो शुरू करने की इजाजत भले दे दी है, लेकिन अपने फैसले के समय कई सख्त टिप्पणियां भी की गईं। यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया पिछले दिनों एक शो के दौरान भद्दे कमेंट को लेकर विवादों में आए थे और उस एक्शन में उनके 'द रणवीर शो' पर रोक लगा दी गई थी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रणवीर इलाहाबादिया को अपना 'द रणवीर शो' फिर से प्रसारित करने की अनुमति दे दी, बशर्ते कि वो ये वचन दें कि उनके पॉडकास्ट नैतिकता और शालीनता के मानकों को बनाए रखेंगे, ताकि किसी भी आयु वर्ग के दर्शक इसे देख सकें।
रणवीर इलाहाबादिया ने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर कर उस आदेश के एक हिस्से को हटाने की मांग की थी, जिसके तहत उन्हें अपने शो प्रसारित करने से प्रतिबंधित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहाबादिया को अपना शो फिर से शुरू करने की अनुमति है क्योंकि 280 कर्मचारियों की आजीविका इसके प्रसारण पर निर्भर करती है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इलाहाबादिया को शर्तों के साथ रियायत दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने की सख्त टिप्पणियां
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें उम्मीद है कि उसे (रणवीर) पक्षतावा होगा। हालांकि कुछ हैं, जो उनके लिए लेख लिखकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दुहाई दे रहे हैं, लेकिन ये नहीं भूलना चाहिए कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्य भी होते हैं। इसी मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि बोलने का फंडामेंटल राइट होने का मतलब ये नहीं कि कोई कुछ भी बोल सकता है। इस शो को सब लोग देखते हैं। बच्चे देखते हैं। बेटा बेटी, मां बाप सब देखते हैं। कोर्ट ने कहा कि अलग अलग समाज का नैतिक मानक अलग-अलग हो सकते हैं। हमने खुद को अधिकारों की गारंटी दी है, लेकिन वो शर्तों के अधीन हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक टिप्पणी की कि हम ऐसी व्यवस्था नहीं चाहते जो सेंसरशिप को बढ़ावा दे। ह्यूमर एक ऐसी चीज है जिसका आनंद पूरा परिवार ले सकता है। टैलेंट अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करता है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई का दायरा बढाया। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वो सोशल मीडिया ऑनलाइन कंटेट पर अश्लील, आपत्तिजनक कंटेंट को रोकने के लिए रेगुलेटरी मेकनिज्म बनाएं। इसके ड्राफ्ट को कोई कानूनी रूप देने से पहले तमाम स्टेकहोल्डर्स से रायशुमारी लें।
समय रैना के बयानों को लेकर नाराज सुप्रीम कोर्ट
समय रैना को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी देखी गई। सुप्रीम कोर्ट ने कनाडा में समय रैना के टिप्पणी करने पर सवाल उठाया। समय रैना पर जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि एक आरोपी कनाडा जाकर अनाप शनाप बयान दे रहा है। उसे नहीं पता कि कोर्ट के पास कितनी शक्तियां हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि वो बिहेव करें वरना हम जानते हैं कि ऐसे लोगों से कैसे डील करना है।
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Published By : Dalchand Kumar
पब्लिश्ड 3 March 2025 at 16:20 IST