Barrier-Free Toll Plaza: देश में पहली बार 'बैरियर-लेस फ्री फ्लो' टोल सिस्टम की शुरुआत, NH पर बिना रुके कटेगा टोल; सफर का मजा होगा दोगुना
देश में पहली बार गुजरात के NH-48 पर बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम शुरू हो गया है। अब हाईवे पर बिना रुके ही अपने आप टोल कट जाएगा। जानें भारत किस तरह वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर आगे बढ़ रहा है? बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम से कैसे देश की तस्वीर बदलेगी, पढ़ें पूरी खबर।
Barrier Less Toll System: भारत के नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए एक बड़े बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 1 मई को गुजरात के सूरत-भरूच नेशनल हाईवे-48 (NH-48) पर देश के पहले मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम का उद्घाटन किया। चोरयासी टोल प्लाजा पर शुरू हुई यह तकनीक भविष्य में देशभर के टोल नाकों की तस्वीर बदलकर रख देगी।
क्या है बैरियर-लेस फ्री फ्लो सिस्टम?
यह एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जहां सड़क पर कोई फिजिकल बैरियर (डंडा) नहीं होगा। इस सिस्टम में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और उन्नत FASTag कैमरों का इस्तेमाल किया गया है। जब कोई गाड़ी टोल जोन से गुजरेगी, तो कैमरे हाई-स्पीड में भी उसकी नंबर प्लेट और फास्टैग को स्कैन कर लेंगे और टोल की राशि अपने आप कट जाएगी। इसके लिए चालक को गाड़ी धीमी करने या रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस नई पहल से क्या फायदा?
- समय और ईंधन की बचत: टोल पर कतारें नहीं लगेंगी, जिससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी और गाड़ियों के खड़े रहने पर बर्बाद होने वाला ईंधन बचेगा।
- प्रदूषण में कमी: जाम न लगने के कारण कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जो पर्यावरण के लिहाज से एक बड़ी राहत है।
- लॉजिस्टिक्स को रफ्तार: मालवाहक वाहनों और ट्रक चालकों के लिए यह वरदान साबित होगा, जिससे देश में 'ईजी ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिलेगा।
- डिजिटल पारदर्शिता: मानवीय हस्तक्षेप खत्म होने से टोल वसूली की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी हो जाएगी।
वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बड़ा कदम
उद्घाटन के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार देश में विश्व स्तरीय हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह तकनीक आम आदमी के लिए 'ईजी ऑफ लिविंग' को बेहतर बनाएगी, साथ ही भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि गुजरात में इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, इसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और बाकी नेशनल हाइवे पर भी जल्द लागू किया जा सकता है। आने वाले वक्त में यह तकनीक भारत के टोलिंग सिस्टम को पूरी तरह से डिजिटल और बाधा मुक्त बना देगी।
Published By : Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड 1 May 2026 at 19:48 IST