भारत के इस राज्य में शादी के बाद दुल्हन नहीं, दूल्हे की होती है विदाई, संभालना पड़ता है घरबार

भारत में एक ऐसा राज्य भी है जहां शादी के बाद मर्दों को अपना घर छोड़कर ससुराल में शिफ्ट होना पड़ता है। यहां घर के तमाम फैसलों से लेकर बाहर के काम संभालने तक की कमान महिलाओं के हाथ में होती है।

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Unknown Facts | Image: Instagram

Groom Bid Farewell After Marriage: दुनियाभर में आमतौर पर परंपरा है कि शादी के बाद दुल्हन अपने ससुराल जाती है। यह रिवाज सदियों पुराना है जो अबतक चला आ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में ही एक ऐसा राज्य है जहां रिवाज उलटा है। यहां शादी के बाद लड़कियों की नहीं, बल्कि लड़कों की विदाई होती है।

जी हां, भारत में एक ऐसा राज्य भी है जहां शादी के बाद मर्दों को अपना घर छोड़कर पत्नी के घर जमाई बनकर रहना पड़ता है। यहां लड़कियां ही धन-दौलत की वारिस होती हैं।

मेघालय में दूल्हा जाता है ससुराल  

मेघालय ऐसा राज्य है जहां मातृसत्तात्मक समाज है। यहां कुछ क्षेत्रों में खासी जनजाति के लोग रहते हैं। इस राज्य में बेटियों के पैदा होने पर जश्न होता है और बेटों के पैदा होने को बुरा माना जाता है।  यहां लड़के शादी के बाद अपनी पत्नी के घर शिफ्ट होते हैं। यहां उन्हें घरवालों की देखभाल करनी होती है। इतना ही नहीं, यहां पर बच्चे पिता के नहीं, मां के सरनेम को आगे बढ़ाते हैं। मेघालय की खास बात ये है कि यहां दहेज जैसी कोई प्रथा ही नहीं है। यहां अरेंज मैरिज भी कम ही होती है।

महिलाएं कर सकती हैं कई शादियां

मेघालय में इस जनजाति में ऐसे कई रिवाज हैं जो बाकी जगहों से बिल्कुल हटकर है। जैसे कि लड़कियों पर किसी तरह की रोक-टोक नहीं होती है। वे कई पुरुषों से शादी कर सकती हैं। महिलाएं ही सब्जी, मीट और मेडिकल स्टोर चलाती है। इसके अलावा शराब की दुकानों की भी दुकानदार महिलाएं ही हैं।

धन-दौलत की वारिस होती हैं बेटियां

बताया जाता है कि यहां पर सारी प्रॉपर्टी बड़ी बेटी के नाम पर ही होती है। उन्हें अपने पेरेंट्स की जिम्मेदारी उठानी होती है और उनका ख्याल रखना होता है। इस जनजाति में परिवार के तमाम बड़े फैसले महिलाएं ही लेती हैं।

क्यों शुरू हुई ऐसी परंपरा?

ऐसी परंपरा शुरू करने का खास मकसद सोसाइटी में बैलेंस बनाना बताया गया है। हालांकि, यहां कई पुरुषों ने इस प्रथा में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि वे महिलाओं को नीचा नहीं दिखाना चाहते, बल्कि बराबरी के हक की मांग करते हैं।

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Published By : Priyanka Yadav

पब्लिश्ड 29 September 2025 at 09:45 IST