अपडेटेड 16 March 2026 at 17:57 IST

Harish Rana: कैसे दी जाती है इच्छा मृत्यु, क्या इसमें होता है असहनीय दर्द? जानिए क्या है पूरा प्रोसेस

Harish Rana: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरीण राणा की इच्छा मृत्यु की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जो पैसिव यूथनेशिया है। इसका क्या प्रोसेस है और इसमें शरीर में कैसा क्या असर पड़ता है? इन सभी सवालों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Harish rana passive euthanasia | Image: X

Harish Rana: सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उनके माता-पिता की निष्क्रिय इच्छामृत्यु Passive Euthanasia की मांग को स्वीकार कर लिया है। इसके बाद दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल ने चिकित्सीय प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे यह सवाल सामने आता है कि निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया क्या होती है, यह सक्रिय इच्छामृत्यु से कैसे अलग है और भारत में इसकी कानूनी स्थिति क्या है। क्या इसमें दर्द होता है और शरीर में क्या बदलाव होते हैं?

क्या होती है पैसिव यूथेनेसिया यानी कि इच्छामृत्यु?

भारत में जिस इच्छा मृत्यु को कानूनी मंजूरी मिली हुई है, वह निष्क्रिय इच्छामृत्यु है। इसमें मरीज को जीवित रखने के लिए दिए जा रहे जीवन रक्षक उपचारों को हटा दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर वेंटिलेटर, फीडिंग ट्यूब, या अन्य मेडिकल सपोर्ट सिस्टम को धीरे-धीरे बंद किया जाता है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर कोई ऐसा इंजेक्शन नहीं देते हैं। जिससे मरीज की तुरंत मौत हो जाए। बल्कि मरीज को प्राकृतिक रूप से मृत्यु होने दी जाती है। मरीज को दर्द से राहत देने के लिए  पैलिएटिव केयर यानी आराम देने वाली चिकित्सा जारी रहती है।

इच्छा मृत्यु कितने तरह के होते हैं?

इच्छा मृत्यु दो प्रकार के होते हैं। पहला सक्रिय और दूसरा निष्क्रिय यानी कि एक्टिव और पैसिव। सक्रिय इच्छा मृत्यु में डॉक्टर किसी इंजेक्शन या दवा के जरिए सीधे मरीज की जान ले लेते हैं। यह प्रक्रिया कई देशों में कानूनी है, लेकिन भारत में इसे अभी भी अवैध माना जाता है।
वहीं निष्क्रिय इच्छामृत्यु में उपचार को रोककर शरीर को प्राकृतिक तरीके से मृत्यु की ओर जाने दिया जाता है। भारत में कानूनी तौर पर इसी तरीके की अनुमति दी जाती है और वह भी सख्त न्यायिक और चिकित्सीय प्रक्रिया के बाद ही होता है।

शरीर में क्या होता है?

  • जब जीवन-रक्षक मशीनें को हटाए जाते हैं, तो शरीर धीरे-धीरे अपनी प्राकृतिक प्रक्रिया के अनुसार काम करना बंद करने लगता है।
  • सबसे पहले शरीर की ऊर्जा कम होने लगती है। यदि मरीज वेंटिलेटर पर है और उसे हटाया जाता है, तो सांस लेने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है। इसी तरह अगर फीडिंग ट्यूब हटाई जाती है, तो शरीर को पोषण नहीं मिलता और अंग धीरे-धीरे काम करना बंद करने लगते हैं।
  • इस पूरी प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर यह सुनिश्चित करते हैं कि मरीज को किसी तरह का दर्द या बेचैनी महसूस न हो। इसके लिए दर्द निवारक दवाएं, ऑक्सीजन सपोर्ट और सिडेशन यानी नींद की स्थिति जैसी चिकित्सा दी जाती है।

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क्या इसमें दर्द होता है?

निष्क्रिय इच्छा मृत्यु में शरीर को कोई कष्ट नहीं होता है। बल्कि चिकित्सा से मुक्ति दिलाना होता है। इसलिए मरीज को शांत और आरामदायक रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। अक्सर मरीज को हल्की सिडेशन दी जाती है, जिससे वह गहरी नींद जैसी अवस्था में रहता है। इस वजह से उसे दर्द या घुटन का अनुभव बहुत कम या लगभग नहीं होता है। 

Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 16 March 2026 at 17:57 IST