अपडेटेड 19 February 2024 at 10:20 IST

सरकार ने दिया आउट ऑफ द बॉक्स प्रस्ताव! असमंजस में किसान नेता, मांगा वक्त

किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि 21 फरवरी के 'दिल्ली चलो' मार्च का निर्णय एमएसपी पर सरकार के प्रस्ताव के बाद गहन विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा।

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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल | Image: ANI

Farmers Protest Update:  आंदोलन का 19 फरवरी को सातवां दिन है। इससे पहले 18 फरवरी की देर रात तक प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के नेता और केन्द्र के बीच बैठक हुई। जिसमें किसानों के सामने सरकार की ओर से प्रस्ताव रखा गया। इसे सरकार की बड़ी सफलता को तौर पर देखा जा रहा है।

प्रस्ताव में 3 फसलों पर एमएसपी की बात है। इस पर किसान नेताओं का कहना है कि उन्हें 2 दिन का वक्त चाहिए। वो विचार करेंगे फिर दिल्ली कूच के इरादे पर फैसला लेंगे।

सरकार का आउट ऑफ द बॉक्स प्लान

किसान संघ के साथ अपनी बैठक के बाद, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा- हमारी चर्चा सकारात्मक रही। हमने किसानों को दाल, कपास और मक्का पर 5 साल के लिए MSP पर खरीदने का प्रपोजल दिया है। इस पर किसानों ने कहा कि वे आज (19 फरवरी को) इस पर चर्चा करके बताएंगे...हमने मिलकर एक बहुत ही इनोवेटिव(अभिनव), आउट-ऑफ-द-बॉक्स (लीक से हटकर) विचार प्रस्तावित किया है।

'5 साल का कॉन्ट्रैक्ट'

गोयल ने आगे कहा- 'सरकार ने एनसीसीएफ (भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ) और नेफेड (राष्ट्रीय) जैसी सहकारी समितियों को बढ़ावा दिया है।" इसके तहत एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया) अगले 5 साल के लिए कॉनट्रैक्ट ( अनुबंध) बनाएंगी और किसानों से एमएसपी पर उत्पाद खरीदेगी। मात्रा की कोई सीमा नहीं होगी..."।

गोयल ने आगे कहा, "बैठक के दौरान, किसानों ने घटते जल स्तर के बीच फसल विविधीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।"

असमंजस में किसान नेता?

बैठक के बाद पंजाब किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के जनरल सेक्रेटरी सरवण सिंह पंधेर  ने कहा-"सरकार के प्रपोजल पर चर्चा करेंगे। हम आज सुबह या शाम या फिर कल तक इस पर फैसला ले लेंगे। मंत्री ने कहा कि वे दिल्ली में बातचीत करके हमारी अन्य मांगों को लेकर भी चर्चा करेंगे।

अभी हमारी सभी मांगों को लेकर सरकार से चर्चा नहीं हो पाई है। हम अगले दो दिन में (19-20 फरवरी) सरकार के प्रपोजल पर विचार करेंगे। इसके बाद हमारा 21 फरवरी को होने वाले दिल्ली चलो मार्च पर फैसला लेंगे। हम भी चाहते हैं कि सरकार के साथ मिल-बैठकर कोई हल निकाल लिया जाए।"

एमएसपी को लेकर हंगामा

एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी एक विवादास्पद मुद्दा बनी हुई है क्योंकि किसानों ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप फॉर्मूला तय करने की मांग की है। आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार, यह फॉर्मूला उत्पादन की भारित लागत का 50% है, जबकि सरकार वर्तमान में एमएसपी के रूप में किसानों को इनपुट लागत से 1.5 गुना अधिक प्रदान करती है।

बैठक में मौजूद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, "चर्चा पांच घंटे तक चली। मैंने पंजाब के फायदे के बारे में बात की। हमने दालों की खरीद पर एमएसपी की गारंटी मांगी थी, जिस पर आज चर्चा हुई।" 

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Published By : Kiran Rai

पब्लिश्ड 19 February 2024 at 07:24 IST