अपडेटेड 19 February 2026 at 11:02 IST

AI Summit: 'भारत की डिजिटल उपलब्धियां दुनिया के लिए मिसाल', इमैनुएल मैक्रों ने तारीफों में बांधे पुल, 'नमस्ते' से की संबोधन की शुरुआत

Emmanuel Macron at AI Summit: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने AI समिट में कहा कि 10 साल पहले, दुनिया ने भारत से कहा था कि 1.4 बिलियन लोगों को डिजिटल इकॉनमी में नहीं लाया जा सकता। भारत ने उन्हें गलत साबित कर दिया।

Follow :  
×

Share


Emmanuel Macron at AI Summit | Image: Youtube

India-Al Impact Summit 2026: दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहे 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026' जारी है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इससे पहले समिट के उद्घाटन सत्र में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत की डिजिटल प्रगति की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ में AI क्रांति का नेतृत्व कर रहा है। उसकी डिजिटल उपलब्धियां दुनिया के लिए मिसाल हैं। इस मौके पर वहां पीएम मोदी भी मौजूद रहे।

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने उद्घाटन सत्र में अपने संबोधन की शुरुआत 'नमस्ते' से की। उन्होंने कहा कि इस शानदार शहर में, इस शानदार देश में हमारा स्वागत करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। 2024 स्टेट विजिट के बाद प्रधानमंत्री के द्वारा होस्ट किए गए इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट के लिए आकर बहुत अच्छा लग रहा है।

मैक्रों ने भारत के UPI को सराहा

उन्होंने कहा कि 10 साल पहले, मुंबई में एक स्ट्रीट वेंडर बैंक अकाउंट नहीं खोल सकता था। कोई पता नहीं, कोई कागजात नहीं, कोई एक्सेस नहीं और आज वही वेंडर अपने फोन पर पेमेंट लेता है।

मैक्रों ने कहा कि भारत ने कुछ ऐसा बनाया है जो दुनिया के किसी और देश ने नहीं बनाया है। 1.4 बिलियन लोगों के लिए एक डिजिटल आइडेंटिटी, एक पेमेंट सिस्टम जो अब हर महीने 20 बिलियन ट्रांजेक्शन प्रोसेस करता है। एक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर जिसने 500 मिलियन डिजिटल हेल्थ ID जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया इसे आज ‘इंडिया स्टैक’ नाम से पहचानती है और यह पूरी तरह खुला (Open) और सबके लिए सुलभ ढांचा है।

मैक्रों ने आगे कहा कि AI, GPU, चिप्स अब सीधे जियोपॉलिटिकल और मैक्रोइकोनॉमिक शब्दों में बदल गए हैं। एक साल पहले, हमने कुछ और दिखाया था... भारत ने सोच-समझकर सॉवरेन चॉइस, SML, छोटे लैंग्वेज मॉडल बनाए। टास्क-स्पेसिफिक, स्मार्टफोन पर चलने के लिए डिजाइन किया गया, भारत ने पहला सरकारी फंडेड AI बनाया और देश के हर स्टार्टअप को सबसे सस्ते रेट पर 38,000 GPU दिए।

फ्रांस और भारत का एक ही विजन- मैक्रों

उन्होंने कहा कि इस समिट का मकसद सिर्फ यह नहीं था कि, चलो और करते हैं, बल्कि यह कहना था कि चलो मिलकर बेहतर करते हैं। AI प्रोडक्टिविटी का एक पावरफुल एक्सेलरेटर और लेबर मार्केट के लिए एक बड़ा बदलाव हो सकता है। इसीलिए सभी के लिए AI तक पहुंच बहुत जरूरी है। फ्रांस और भारत का एक ही विजन है। एक सॉवरेन AI का इस्तेमाल हमारे ग्रह की रक्षा करने और सभी के लिए खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए किया जाए। पिछले साल पेरिस में, हमने इसे एक्शन कहा था। इस साल दिल्ली में हम इसे इम्पैक्ट कहते हैं। 

‘भारत ने उन्हें गलत साबित कर दिया…’

उन्होंने कहा कि 10 साल पहले, दुनिया ने भारत से कहा था कि 1.4 बिलियन लोगों को डिजिटल इकॉनमी में नहीं लाया जा सकता। भारत ने उन्हें गलत साबित कर दिया। आज, कुछ लोग कहते हैं कि AI एक ऐसा खेल है जिसे सिर्फ सबसे बड़े लोग ही खेल सकते हैं। भारत, फ्रांस, यूरोप और हमारे साझेदार- वे कंपनियां, सरकारें और निवेशक जो हमारे दृष्टिकोण में विश्वास रखते हैं, एक अलग रास्ता अपना सकते हैं। AI का भविष्य वे लोग बनाएंगे जो इनोवेशन और जिम्मेदारी, टेक्नोलॉजी को इंसानियत के साथ जोड़ेंगे। भारत और फ्रांस मिलकर इस भविष्य को बनाने में मदद करेंगे।

यह भी पढे़ं: 'आपका 6 मुझे 9 भी तो लग सकता है' AI समिट में 'चाइनीज माल' चेप कर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की थू-थू कराने वाली प्रोफेसर नेहा का इस्‍तीफा

Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 19 February 2026 at 10:52 IST