'30 लाख वोटरों का नाम काटने की साजिश', अभिषेक बनर्जी ने व्हाट्सएप स्क्रीनशॉर्ट किए शेयर, CEC ज्ञानेश कुमार और CJI सूर्यकांत से मांगे जवाब

अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग के एक व्हाट्सएप ग्रुप के स्क्रीनशॉर्ट्स शेयर किए और आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से 30 लाख नाम हटाने की कथित साजिश रची गई।

 
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अभिषेक बनर्जी | Image: ANI

Abhishek Banerjee on CEC Gyanesh Kumar: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गंभीर आरोपों के बाद चौतरफा घिरते नजर आ रहे हैं। विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन की बात कही है। वहीं, ममता बनर्जी गुट के सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग के एक व्हाट्सएप ग्रुप के कुछ स्क्रीनशॉट्स शेयर कर उन पर तीखा हमला बोला है।

अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया हैंडल X पर ट्वीट कर आरोप लगाया कि ऑब्जर्वर के एक व्हाट्सएप ग्रुप का यह स्क्रीनशॉट अप्रैल का है। यह वोटर लिस्ट से 30 लाख नाम हटाने की कथित साजिश के बारे में गंभीर सवाल उठाता है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसे दबाया नहीं जा सकता और इसका जवाब चुप रहकर नहीं दिया जा सकता।

अभिषेक बनर्जी ने CJI और CEC से मांगे जवाब

उन्होंने सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि CEC ज्ञानेश कुमार और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत के पास इस देश के लोगों के सामने गंभीर सवाल हैं, जिनका जवाब देना होगा। बनर्जी ने कहा कि देश देख रहा है और सवाल पूछ रहा है। देश जवाब मांग रहा है। तैयार हो जाइए।

September 24, 2026

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत

इससे पहले ममता गुट की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि मैं आज पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन आई हूं और देश के मुख्य चुनाव आयुक्त 'चोर' ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली देखकर ऐसा लगता है कि उन्हें शायद कानूनी छूट मिली है। उन्होंने CEC और EC अधिनियम, 2023 की धारा 16 का हवाला देते हुए कहा कि इसके अनुसार छूट तब मिलती है जब चुनाव आयुक्त सामूहिक संस्था के तौर पर काम करते हैं।

दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार असहमति जताई- महुआ

महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने 14 बार असहमति जताई। उन्होंने कहा कि कुछ फैसले बहुमत से नहीं लिए गए थे। उन्होंने नियमों का उल्लेख कर कहा कि यह फैसले बहुमत से नहीं लिए गए थे इसलिए ज्ञानेश कुमार को कोई छूट नहीं मिल सकती और उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

'फॉर्म 6 में नया कॉलम जुड़ना गैर कानूनी'

महुआ मोइत्रा ने कहा कि नए वोटरों के लिए फॉर्म 6 में माता-पिता की जानकारी से जुड़ा एक नया सवाल जोड़ा गया, जिसे दोनों चुनाव आयुक्तों ने गैर कानूनी बताया था। उन्होंने यह भी आरोप मढ़ा कि चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) और ब्लॉक-लेवल अधिकारियों (BLO) जैसे जमीनी अधिकारियों को आवश्यक जानकारी सॉफ्टवेयर एक्सेस तक उपलब्ध नहीं किया गया।

September 24, 2026

सीमा खन्ना पर भी लगाए आरोप

इस दौरान उन्होंने निर्वाचन आयोग में डायरेक्टर जनरल ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सीमा खन्ना को लेकर कहा कि उन्होंने ERO और ब्लॉक लेवल अधिकारियों को अंधेरे में रखकर वोटर लिस्ट में हेरफेर करने के लिए सॉफ्टवेयर के बैक-एंड से छेड़छाड़ की थी।

वोटिंग प्रक्रिया लोकतंत्र का आधार- महुआ

ममता गुट की सांसद ने आगे कहा, 'उदाहरण के लिए बंगाल में 33 लाख वैध वोटर लिस्ट में थे, लेकिन EC ने उनके खिलाफ अपील की। ​​जब मिस्टर संधू ने पूछा कि ये अपील किसने की हैं? EC ने तो ऐसा नहीं किया है तो ज्ञानेश कुमार और पश्चिम बंगाल के CEO के पास कोई जवाब नहीं था। फिर भी इन 33 लाख वोटरों को लिस्ट से बाहर रखा गया।'

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वोटिंग प्रक्रिया की विश्वसनीयता लोकतंत्र का आधार है। ऐसे में जब तक चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक बाकी राजनीतिक मुद्दों का कोई महत्व नहीं रह जाता। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

किस मामले पर मचा है पूरा बवाल?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है जिस पर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

बुधवार को एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के द्वारा एसआईआर को लेकर पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई गई, इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।   

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Published By : Priyanka Yadav

पब्लिश्ड 25 September 2026 at 11:07 IST