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अपडेटेड 26 February 2026 at 08:14 IST

CBSE Result 2026: परीक्षा में आए कम मार्क्स? तो अब छात्रों को घबराने की नहीं है जरूरत, जानिए इम्प्रूवमेंट और री-चेकिंग की पूरी प्रक्रिया

CBSE Result 2026: सीबीएसई बोर्ड CBSE के नतीजे घोषित होने के बाद कई छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं होते हैं। अगर आपके मार्क्स उम्मीद से कम आए हैं, तो घबराने या निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। बोर्ड आपको अपनी परफॉरमेंस सुधारने के लिए दो मुख्य रास्ते देता है पहला री-चेकिंग और दूसरा इम्प्रूवमेंट परीक्षा। आइए जानते हैं कि पूरा प्रक्रिया क्या है?

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cbse board exams 2026 | Image: Freepik

CBSE Result 2026:  सीबीएसई CBSE बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित होते ही कहीं खुशी तो कहीं मायूसी का माहौल देखने को मिलता है। कई बार छात्र अपनी मेहनत के अनुरूप परिणाम न पाकर हताश हो जाते हैं। अगर आपके मार्क्स उम्मीद से कम आए हैं या आप किसी विषय में फेल हो गए हैं, तो घबराने या हार मानने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
सीबीएसई छात्रों को अपने अंक सुधारने और उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराने के लिए कई विकल्प प्रदान करता है। आइए जानते हैं री-चेकिंग और इम्प्रूवमेंट (Improvement) की पूरी प्रक्रिया क्या है?

वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन पॉलिसी क्या है?

  • अगर आपको लगता है कि आपकी उत्तर शीट की जांच में कोई कमी रह गई है, तो आप इन तीन चरणों का पालन कर सकते हैं। 
  • सबसे पहले छात्र को ऑनलाइन आवेदन करना होता है ताकि यह जांचा जा सके कि सभी उत्तरों के अंक जोड़े गए हैं या नहीं। इसमें टोटलिंग की गलतियां सुधारी जाती हैं।
  • यदि आप सत्यापन के बाद भी संतुष्ट नहीं हैं, तो आप अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी मांग सकते हैं। इससे आप स्वयं देख पाएंगे कि कहां अंक कटे हैं।
  • यदि आपको फोटोकॉपी देखने के बाद किसी विशेष प्रश्न के उत्तर पर संदेह है, तो आप उस प्रश्न के पुनर्मूल्यांकन के लिए चुनौती दे सकते हैं।
  • इस बात का ध्यान जरूर दें कि इन सभी प्रक्रियाओं के लिए सीबीएसई एक निश्चित समय सीमा तय करता है, जो रिजल्ट आने के कुछ दिनों के भीतर ही शुरू हो जाती है। इसके लिए प्रति विषय शुल्क भी देना होता है।

सप्लीमेंट्री/कम्पार्टमेंट परीक्षा दे सकते हैं

यदि कोई छात्र एक या दो विषयों में पासिंग मार्क्स नहीं ला पाया है, तो वह सप्लीमेंट्री परीक्षा में बैठ सकता है। यह परीक्षा आमतौर पर मुख्य परिणाम के कुछ महीनों बाद आयोजित की जाती है। इससे छात्र का पूरा साल बर्बाद होने से बच जाता है।

इम्प्रूवमेंट परीक्षा भी दे सकते हैं

  • अगर आप पास तो हैं, लेकिन अपने प्रतिशत से खुश नहीं हैं, तो आप इम्प्रूवमेंट परीक्षा दे सकते हैं।
  • छात्र एक या अधिक विषयों में अपना स्कोर सुधारने के लिए अगले वर्ष की मुख्य परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
  • सीबीएसई अब छात्रों को उसी वर्ष की सप्लीमेंट्री परीक्षा में भी एक विषय में सुधार करने का मौका देता है।

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थ्योरी vs प्रैक्टिक नियमों में इतना अंतर

  • सीबीएसई बोर्ड का मानना है कि प्रैक्टिकल परीक्षाओं की प्रकृति थ्योरी परीक्षाओं से बिल्कुल अलग होती है, इसलिए इन्हें पुनर्मूल्यांकन के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित तर्क दिए गए हैं।
  • प्रैक्टिकल परीक्षाएं स्कूल स्तर पर बाहरी परीक्षकों की देखरेख में होती हैं। छात्र के प्रदर्शन का मूल्यांकन उसी समय मौके पर किया जाता है और अंक तुरंत पोर्टल पर 'फ्रीज' कर दिए जाते हैं।
  • थ्योरी परीक्षा के विपरीत, प्रैक्टिकल में छात्र के कौशल और प्रदर्शन का कोई स्थायी लिखित रिकॉर्ड नहीं होता जिसे बाद में फिर से जांचा जा सके।

Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 26 February 2026 at 08:14 IST