'शिवराज से ज्यादा चंदा दिया था, वापस लेने कोर्ट जाऊंगा, थाने पर भरोसा नहीं क्योंकि...', राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर भड़के दिग्विजय सिंह का ऐलान
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। भोपाल में महिला कांग्रेस के प्रदर्शन में पहुंचे दिग्विजय सिंह ने BJP और RSS पर तीखे तेवर दिखाते हुए एक ऐसा ऐलान कर दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
- भारत
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। भोपाल में महिला कांग्रेस के प्रदर्शन में पहुंचे दिग्विजय सिंह ने BJP और RSS पर तीखे तेवर दिखाते हुए एक ऐसा ऐलान कर दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
उन्होंने बताया कि वे राम मंदिर निर्माण के दौरान हुई कथित चंदा वसूली में गड़बड़ी और उज्जैन में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालेंगे। उनके मुताबिक यह यात्रा 2 अक्टूबर से शुरू होगी और इसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं होगा।
दिग्विजय सिंह की मांग
सभा में बोलते हुए दिग्विजय सिंह ने खुलासा किया कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपये का योगदान दिया था। अब वे चाहते हैं कि यह राशि उन्हें वापस मिले, ताकि वे इसे दोबारा ट्रस्ट में जमा करा सकें। उनका आरोप है कि उनके द्वारा दिया गया चंदा गबन का शिकार हुआ है।
इस मामले को लेकर वे सीधे पुलिस के पास जाने के बजाय अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उनका तर्क था कि पुलिस व्यवस्था BJP के प्रभाव में काम करती है, इसलिए उन्हें थाने पर भरोसा नहीं है।
शिवराज के दान से हुई थी शुरुआत
दिग्विजय सिंह ने पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जब मंदिर निर्माण के लिए चंदा अभियान शुरू हुआ था, तब मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक लाख रुपये का दान दिया था। इससे प्रेरित होकर उन्होंने खुद से एक हजार रुपये ज्यादा यानी 1 लाख 11 हजार रुपये देने का फैसला किया।
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था कि दान की रकम सही तरीके से ट्रस्ट के खाते में पहुंचे। उनके अनुसार यह दान भगवान राम के प्रति उनकी आस्था और भव्य मंदिर बनते देखने की इच्छा से प्रेरित था।
चंपत राय पर सीधा निशाना
अपने भाषण में दिग्विजय सिंह ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इमरजेंसी में चंपत राय नागपुर भाग गए थे, जहां वे RSS प्रचारक बने। इसके बाद विश्व हिंदू परिषद में शामिल होकर अशोक सिंघल के करीबी बन गए और वहीं से चंदा संग्रह का काम संभालने लगे।
दिग्विजय सिंह के अनुसार, अयोध्या मामले में फैसला आने के बाद जब ट्रस्ट गठित हुआ, तो पूरी कमान चंपत राय को सौंप दी गई, जबकि ट्रस्टियों की सूची में कोई साधु-संत या शंकराचार्य शामिल नहीं किए गए।
"10 से 20 प्रतिशत चंदा गायब हो जाता था"
दिग्विजय सिंह ने सबसे गंभीर आरोप ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन को लेकर लगाया। उनका कहना था कि चंपत राय ने महज दस से पंद्रह हजार रुपये मासिक वेतन पर कर्मचारी रखे, लेकिन इसके बावजूद रोज आने वाले चंदे का बड़ा हिस्सा, करीब 10 से 20 प्रतिशत, नकदी के रूप में रहस्यमय ढंग से गायब हो जाता था। उन्होंने दावा किया कि इस गड़बड़ी में बैंक अधिकारी और ट्रस्ट के कर्मचारी भी शामिल रहे। कांग्रेस नेता ने इसे आम जनता की आस्था के साथ बड़ा धोखा करार दिया।
Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 3 July 2026 at 21:02 IST