'40 साल का समर्पण, जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा...', पद छोड़ते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने लिखी भावुक चिट्ठी, पढ़िए इस्तीफे की बड़ी बातें
नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया है। पीएम मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने बताया कि वे जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे हैं और 40 साल से समर्पित रहे हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से आंदोलन छोड़ पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील की।
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Dharmendra Pradhan Resigns: देशभर में नीट (NEET) पेपर लीक विवाद को लेकर छात्रों के जारी प्रदर्शन के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक लेटर साझा करते हुए जानकारी दी कि उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया है।
अपने त्यागपत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने भावुक होते हुए लिखा कि नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ियों की खबर आते ही उन्होंने पूरी जिम्मेदारी ली और कभी भी परिस्थिति से पीछे नहीं हटे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले 10 दिनों में जिस तरह के घटनाक्रम और विरोध प्रदर्शन हुए हैं, उससे उनका मन बेहद आहत था। उन्होंने कहा, "यह मेरे लिए किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है।"
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की चिट्ठी की बड़ी बातें-
- धर्मेंद्र प्रधान ने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेजने की जानकारी दी। उन्होंने पीएम मोदी के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार जताया।
- लेटर में धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि वे पिछले 40 से अधिक साल (चार दशकों) से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहे हैं।
- पत्र में उन्होंने बताया कि किस तरह NEET-UG परीक्षा में अनियमितता सामने आते ही मामले की जांच तुरंत CBI को सौंपी गई, परीक्षा रद्द की गई और संपूर्ण सरकारी तंत्र और जिला प्रशासन के सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा संपन्न कराई गई।वहीं, 16 जुलाई 2026 को घोषित NEET-UG के संशोधित परिणामों को उन्होंने संतोषजनक बताया, जिससे गरीब पृष्ठभूमि के कई मेधावी छात्रों को सफलता मिली।
- सुधार की दिशा में कदम उठाते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी जानकारी दी कि अगले साल से नीट परीक्षा पेन-पेपर मोड के बजाय कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) फॉर्मेट में आयोजित की जाएगी।
- उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हमेशा से 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षा को पारदर्शी और सुचारू रूप से पूरा कराना रही है।-
- धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह किया और बाधाएं खड़ी कीं, जिससे उनका मन अत्यंत व्यथित हुआ।
- उन्होंने पिछले 10 दिनों की घटनाओं पर दुख जताते हुए चिंता व्यक्त की कि जंतर-मंतर की स्थिति का फायदा कोई राष्ट्रविरोधी ताकत न उठा सके और छात्रों का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, इसीलिए उन्होंने पद छोड़ना उचित समझा।
- धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं को देश की असली ताकत बताते हुए उनसे आंदोलन छोड़ अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।
- पत्र के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए लिखा कि संकट के इस दौर में मिले मार्गदर्शन और सहयोग के लिए वे सदैव ऋणी रहेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और वे भविष्य में भी देश, ओडिशा की जनता और भारत की युवा शक्ति की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए समर्पित भाव से कार्य करते रहेंगे।
अब छात्रों का आंदोलन खत्म होगा?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ही थी, जिस पर वे लगातार अड़े हुए थे। ऐसे में अब इस बड़े कदम के बाद माना जा रहा है कि आंदोलन का रुख बदल सकता है।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 25 July 2026 at 15:01 IST