उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पर बोले धनखड़, कहा- इनको हटाने के नोटिस पर विचार करने का अधिकार सभापति के पास
धनखड़ ने व्यवस्था दी कि उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश को हटाने के लिए सदन के कुछ सदस्यों ने जो नोटिस दिया है, उस पर विचार करने का अधिकार सभापति के पास है।
राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ ने बृहस्पतिवार को व्यवस्था दी कि उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश को हटाने के लिए सदन के कुछ सदस्यों ने जो नोटिस दिया है, उस पर विचार करने का अधिकार सभापति के पास है। धनखड़ ने इस मुद्दे पर अपनी व्यवस्था देते हुए कहा कि उच्च सदन के सदस्यों के 55 हस्ताक्षर वाला एक नोटिस 13 दिसंबर 2024 को प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि इस नोटिस में संविधान के अनुच्छेद 124(4) के तहत इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शेखर यादव को हटाने का अनुरोध था।
धनखड़ ने आगे कहा कि..
उन्होंने कहा कि संविधान के तहत इस विषय पर विचार करने का अधिकार विशेष तौर पर राज्यसभा के सभापति तथा वस्तुत: संसद एवं माननीय राष्ट्रपति के पास है। सभापति ने उच्च सदन के महासचिव को यह निर्देश दिया कि वह इन सूचनाओं से उच्चतम न्यायालय के महासचिव को अवगत करा दें।
विपक्ष के विभिन्न सांसदों ने 13 दिसंबर 2024 को न्यायमूर्ति यादव के विरूद्ध महाभियोग चलाने का नोटिस दिया था। इन सदस्यों में कपिल सिब्बल, विवेक तन्खा, दिग्विजय सिंह, जॉन ब्रिटास, मनोज कुमार झा, साकेत गोखले एवं अन्य शामिल थे। इन सांसदों ने विश्व हिन्दू परिषद के एक कार्यक्रम में न्यायमूर्ति द्वारा दिये गये एक बयान को लेकर उनके खिलाफ नोटिस दिया था।
(Note: इस भाषा कॉपी में हेडलाइन के अलावा कोई बदलाव नहीं किया गया है)
Published By : Garima Garg
पब्लिश्ड 13 February 2025 at 17:39 IST