अपडेटेड 15 November 2025 at 16:09 IST
ब्लास्ट से पहले आतंकी उमर कर रहा था दो-दो मोबाइल का इस्तेमाल, फरीदाबाद की एक दुकान में बैठा दिख रहा परेशान, नया CCTV फुटेज आया सामने
लाल किला ब्लास्ट में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के कुख्यात आतंकी उमर मोहम्मद का नए CCTV फुटेज सामने आया है। CCTV में जैश आतंकी उमर दो मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहा है।
Delhi Red Fort Blast : दिल्ली में लाल किले के पास हाल ही में हुए धमाके ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में जैश-ए-मोहम्मद के कुख्यात आतंकी उमर मोहम्मद का नाम प्रमुखता से सामने आया है। अब फरीदाबाद से मिले एक CCTV फुटेज ने इस आतंकी की फरारी के दौरान की गतिविधियों को सामने ला दिया है। इस वीडियो में उमर को 2 मोबाइल फोन के साथ एक मोबाइल शॉप पर देखा गया है।
इस CCTV में उमर घबराया हुआ सा नजर आ रहा है। ये CCTV दिल्ली ब्लास्ट से पहले का है और फरीदाबाद का बताया जा रहा है, जिसमें उमर एक मोबाइल शॉप पर बैठा है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि उमर एक काले बैग के साथ दुकान में बैठा है। वह दुकानदार को बैग से एक मोबाइल फोन निकालकर देता है और चार्जिंग के लिए कहता है। इस दौरान उसके पास दूसरा मोबाइल फोन भी नजर आता है, जिसे वह बार-बार चेक करता रहता है।
लाल किला ब्लास्ट का मुख्य आरोपी
ये पहला वीडियो है, जिसमें आतंकी उमर को इतने करीब से देखा जा सकता है। उमर लाल किला ब्लास्ट का मुख्य आरोपी है। जांच में सामने आया है कि उमर ने ही लाल किला ब्लास्ट को अंजाम दिया है।
बेहद परेशान और घबराया हुआ था
दुकानदार के अनुसार, उमर ने फोन चार्ज करने के बाद जल्दबाजी में पैसे चुकाए और चला गया। CCTV से बॉडी लैंग्वेज एनालिसिस से साफ पता चलता है कि वह बेहद परेशान और घबराया हुआ था। उसके कंधे झुके हुए, नजरें इधर-उधर भटक रही थीं और बार-बार दरवाजे की ओर झांक रहा था। माना जा रहा है कि उसकी फरारी की निशानी है, जब वह दिल्ली में घुसने से पहले सतर्कता बरत रहा था।
2 मोबाइल बने रहस्य
इस वीडियो से पता चलता है कि उमर के पास फरारी के दौरान कम से कम दो मोबाइल फोन थे। एक फोन को वह चार्जिंग के लिए इस्तेमाल कर रहा था, जबकि दूसरा उसके जेब में था। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, 10 नवंबर को लाल किला ब्लास्ट के समय उमर के पास कोई मोबाइल फोन नहीं मिला। जांच एजेंसियों का अनुमान है कि दिल्ली में आने से ठीक पहले उमर ने दोनों फोन या तो नष्ट कर दिए या कहीं छिपा दिए, ताकि उसकी लोकेशन ट्रैक न हो सके। यह रणनीति जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग मैनुअल से प्रेरित लगती है, जहां आतंकियों को डिजिटल फुटप्रिंट छिपाने की सलाह दी जाती है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 15 November 2025 at 15:56 IST