अपडेटेड 28 February 2026 at 17:13 IST
अरविंद केजरीवाल की भावुकता को कपिल मिश्रा ने बताया ओवरएक्टिंग और तमाशा, कहा- 11 साल दिल्ली को खून के आंसू रुलाया
आबकारी मामले में अदालत से पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को राहत मिलने के बाद दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर करारा हमला बोला है।
Kapil Mishra on Kejriwal: राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली की शराब नीति मामले में दिल्ली के अरविंद केजरीवाल और उनके साथी मनीष सिसोदिया को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। राहत मिलने के बाद दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर करारा हमला बोला।
कपिल मिश्रा ने कहा कि, 'कल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जो ओवरएक्टिंग और तमाशा किया, उसे दिल्ली की जनता भली-भांति समझती है। 11 सालों तक दिल्ली को खून के आंसू रुलाने वाले लोग आज भावुकता का नाटक कर रहे हैं। काश, जब आप सत्ता में थे तब आपको दिल्ली का दर्द समझ आया होता। काश, उस समय आपको दिल्ली की सड़कों, पानी, सीवर, यमुना, हवा, स्कूलों और अस्पतालों की हालत की चिंता होती।'
शहर को नशे की ओर धेकाला गया- कपिल मिश्रा
शराब घोटाले का सवाल उठेते हुए कपिल मिश्रा ने कहा कि, 'इस मामले में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों की गंभीर टिप्पणियां सामने आ चुकी हैं। इन टिप्पणियों के बावजूद अलग आप स्वयं को निर्दोष बताते रहे और ईमानदारी का नकली तमगा लेकर घूमते रहे, तो आज एक अदालत के आदेश को “क्लीन चिट” बताकर जश्न मनाना किसे भ्रमित करने का प्रयास है?'
कपिल मिश्रा ने दिल्ली की जनता के सामने सवाल रखते हुए कहा कि, क्या यह सच नहीं कि शराब नीति पर शिकायत आते ही उसे वापस ले लिया गया? अगर नीति ईमानदार थी तो उसे वापस क्यों लिया गया? क्या यह सच नहीं कि जांच की आशंका के बीच सैकड़ों मोबाइल फोन तोड़े गए? अगर कोई गड़बड़ी नहीं थी तो फोन तोड़ने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या यह सच नहीं कि थोक व्यापारियों का कमीशन 5% से बढ़ाकर 12% किया गया? क्या यह सच नहीं कि सीएजी की रिपोर्ट में राजस्व हानि का उल्लेख है? दिल्ली की जनता जानती है कि शराब नीति के दौरान 'एक बोतल के साथ एक बोतल फ्री' जैसी योजनाओं से शहर को नशे की ओर धकेला गया।
कपिल मिश्रा ने उठाए सवाल
कपिल मिश्रा ने कहा कि, कितने परिवार प्रभावित हुए, कितनी माताएं-बहनें पीड़ा में रहीं, उनके आंसुओं का हिसाब कौन देगा? उनकी आह अभी बाकी है, इसलिए जल्दबाजी मत कीजिए। आज आप स्वयं को ईमानदार बताते हैं, लेकिन 11 सालों में दिल्ली की आधारभूत संरचना की जो स्थिति हुई, वह आपके शासन की सच्चाई दर्शाती है। सबसे बड़ा न्याय जनता की अदालत में होता है। जनता की आवाज ही ईश्वर की आवाज होती है। हाल के चुनावों में दिल्ली की जनता ने अपना निर्णय सुना दिया। केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सहित अनेक मंत्री चुनाव हारे और इनकी मुख्यमंत्री हारते-हारते बचीं। यह जनादेश स्पष्ट संदेश है कि भ्रष्टाचार और कुशासन को जनता ने स्वीकार नहीं किया।
कपिल मिश्रा ने आगे कहा कि, मैं फिर कहना चाहता हूं, मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। हाई कोर्ट में प्रक्रिया जारी है। इसलिए जल्दबाजी में विजय का ढोल पीटना उचित नहीं है। दिल्ली और पंजाब दोनों ने भ्रष्टाचार और मिसगवर्नेंस को पहचाना है। दिल्ली का जनादेश स्पष्ट है और यही संदेश पंजाब भी देगा।
शुक्रवार (27 फरवरी) को आबकारी नीति से जुड़े मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 21 बाकी आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया था। इससे राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है और राजधानी में AAP सरकार को अब बीजेपी घेरने की कोशिश में है।
Published By : Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड 28 February 2026 at 17:13 IST